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अब बिहार के सभी अनुमंडल अस्पतालों में होगा कोरोना संक्रमितों का इलाज

पटना: राज्य के सभी 63 अनुमंडल अस्पतालों में अब कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज हो सकेगा। मंगलवार को मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह व्यवस्था कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोरोना संक्रमितों का दबाव कम करने और स्थानीय स्तर पर भी इसके इलाज की सुविधा बहाल करने के मकसद से की जा रही है। इस फैसले की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्वास्थ्य विभाग इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था करने में जुट गया है। इसके लिए संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है।

फिलहाल राज्य के अनुमंडल अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के सैंपल की जांच हो रही है। अब जल्द ही यहाँ पर हल्के और मध्यम लक्षण वाले मरीजों का इलाज भी होगा। अगर मरीज की स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें तुरंत कोविड तथा मेडिकल अस्पतालों में भेजा जाएगा। क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में स्वास्थ्य विभाग को इससे संबंधित आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार ने मीडिया को बताया कि, “बिना लक्षण वाले वैसे मरीज ही होम आइसोलेशन में रहेंगे, जिनके घरों में उनके लिए अलग रहने की सुविधा हो। अगर उनके पास ऐसी सुविधा नहीं होगी तो उन्हें जिला कोविड सेंटर में रखा जाएगा। जो मरीज होम आइसोलेशन में हैं, उनकी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है और चिकित्सकीय सलाह दी जा रही है।”

राज्य सरकार कोरोना मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इस दिशा में अस्पतालों और आइसोलेशन सेंटरों में बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में सहायता बूथ भी स्थापित किए जा रहे हैं। जहाँ तक बात है राज्य में अनुमंडल अस्पतालों की क्षमता की तो फिलहाल इनकी संख्या 55 है। इन अस्पतालों में औसतन 75 से 100 बेड उपलब्ध हैं। इनमें 50 प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इस तरह कोरोना संक्रमितों के लिए लगभग 2200 से अधिक अतिरिक्त बेड उपलब्ध हो जाएंगे।

गौरतलब है कि राज्य में कोरोना के बढ़ते संकट से निपटने के लिए निजी अस्पतालों को भी शामिल करने का फैसला लिया गया है। दरअसल, हाल ही में पीएमसीएच व एनएमसीएच सहित दूसरे सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ जिस तरह की अव्यवस्था देखने को मिली, उसके बाद से ही इस बात की जरूरत महसूस की जा रही थी कि जो मरीज आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें निजी अस्पतालों की तरफ रूख करना पड़ सकता है। इतने समय तक जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों को कोरोना मरीजों का इलाज करने की इजाजत नहीं दी थी। लेकिन अब प्रशासन की ओर से राजधानी के 18 निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमितों का इलाज करने की अनुमति दे दी गई है।

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