कृषि पिटारा

गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए अपनाएँ ये उपाय

नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों में भारत में गेहूं की खेती में वृद्धि हो हुई है। यह खासकर रबी सीजन में किसानों के लिए मुख्य धान्य है। लेकिन इसके साथ ही कई बार प्राकृतिक आपदाओं, कीटों, जंगली जानवरों या उर्वरक की कमी के कारण गेहूं के उत्पादन में कमी आ जाती है। खेत में चूहों का हमला अक्सर किसानों को परेशानी में डाल देती है। इस नुकसान को कम करने के लिए किसानों को कुछ उपाय अपनाने की जरूरत होती है।

गेहूं की बुआई के समय भूमि में पर्याप्त नमी का होना जरूरी है। जल निकासी और सिंचाई के उचित प्रबंधन से चिकनी और रेतीली मिट्टी में भी गेहूं की खेती की जा सकती है। गेहूं की खेती के लिए मिट्टी का PH मान 6.5 से 7.5 अच्छा माना जाता है। इसकी खेती के लिए सही तापमान भी जरूरी है। गेहूं के बीज के अंकुरण के समय तापमान 20-25 डिग्री सेंटीग्रेड तथा हल्की धूप के साथ आर्द्र-ठंडी जलवायु होनी चाहिए।

गेहूं की खेती में उन्नत किस्मों का चयन एक महत्वपूर्ण निर्णय है जो यह निर्धारित करता है कि उपज कितनी होगी। आज के समय में गेहूं की आधुनिक किस्में जैसे HD 3086 और HD 2967 बड़े पैमाने पर उगाई जा रही हैं, लेकिन इन किस्मों का स्थान पर आप अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों जैसे DBW 187, DBW 222 और HD 3226 की खेती कर सकते हैं।

जब गेहूं की फसलें अंकुरित होती हैं और पकती हैं तो खेतों में चूहे विशेष रूप से सक्रिय होते हैं। इस समय इनकी रोकथाम के लिए एक भाग जिंक फास्फाइड को 47 भाग आटा और दो भाग तिल या मूंगफली के तेल में मिलाकर जहरीला चुग्गा तैयार कर लें। चूहों के रहने वाले बिलों का पता लगाने के लिए एक दिन पहले सभी बिलों को बंद कर दें। पहले दो-तीन दिनों तक चूहों को शाम के समय जहर रहित खाना खिलाकर बिना झिझक खाना खाने की आदत दिलानी चाहिए। जब चूहों को विश रहित खाना खाने की आदत पड़ जाए तब जिन बंद बिलों में आपको सुराख दिख रहा हो, वहाँ उक्त मिश्रण को मिलाकर रखें। जब चूहे उस भोजना को खाएँगे तो निश्चित तौर पर उनके प्रकोप में कमी आएगी।

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