कृषि पिटारा मुखिया समाचार

अदरक की अधिक पैदावार के लिए इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली: अदरक की खेती बहुत कम खर्च में अधिक पैदावार देती है। लागत के मुक़ाबले बाज़ार में लगभग पूरे साल इसका अच्छा भाव भी मिलता है। लेकिन इसके लिए यह ज़रूरी है कि इसकी खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए। अदरक की खेती के लिए अगर उपयुक्त जलवायु की बात करें तो इसकी खेती गर्म और आर्द्रता वाले क्षेत्रों में की जाती है। 1500-1800 मि.मी .वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती अच्छी उपज देती है।

उचित जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें अधिक मात्रा में जीवांश या कार्बनिक पदार्थ मौजूद हों, अदरक की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। किसान मित्रों, यदि आप अदरक की खेती करने जा रहे हैं तो मृदा निर्माण से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें। खेत को खरपतवार रहित रखने के लिए मिट्टी को नरम बनाए रखने की आवश्यकता होती है। इसके लिए खेत की समय-समय पर जुताई करें।

अदरक की मुख्य किस्में इस प्रकार हैं – सुप्रभात, सुरूचि, महिमा, हिमगिरी और सुरभी किस्म। ये तीनों ही किस्में पैदावार और गुणवत्ता के लिहाज से काफी अच्छी मानी जाती हैं। इनकी बुआई दक्षिण भारत में मानसून फसल के रूप में अप्रैल से मई के बीच की जाती जो दिसम्बर में परिपक्व होती है। जबकि मध्य एवं उत्तर भारत में अदरक  की खेती अप्रैल से जून महीने के बीच की जाती है। पहाड़ी क्षेत्रो में अदरक की बुआई का सबसे अच्छा समय 15 मार्च के आस-पास का माना जाता है।

किसान मित्रों, अदरक की फसल के लिए बीज कंदों को बोने से पहले 0.25 प्रतिशत इथेन और 0.1 प्रतिशत बाविस्टोन के मिश्रण के घोल में लगभग एक घंटे तक डुबों कर रखें। फिर इसे दो से तीन दिन तक छाया में सूखने दें। जब ये बीज अच्छे तरह से सूख जाए तब करीब 3 से 4 सेंटीमीटर गहरे गड्डे में उनकी बुआई करें। बीजों को बोते समय दो कतारों के बीच कम से कम 25 से 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखें। बीज की बुआई के तुंरत बाद उनके ऊपर घास-फूस, पत्तियाँ और गोबर की खाद डालकर पूरी तरह से ढँक दें। इससे मिट्टी के अंदर नमी बनाए रखना काफी आसान हो जाता है।

अदरक की खेती में बराबर नमी बनाए रखना काफी जरूरी है। इसीलिए इसकी खेती में पहली सिंचाई बुआई के तुंरत बाद करें। अगर आप सिंचाई की बेहतर तकनीक ड्रिप एरिगेशन का प्रयोग करेंगे तो इसके काफी अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। जहाँ तक बात है खाद के प्रयोग की तो आप गोबर की खाद 20 से 25 टन, नाइट्रोजन 100 किलोग्राम, 75 किलोग्राम फास्फेरस और 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में पोटास डालें।

अदरक की खुदाई रोपण के लगभग 8-9 महीने बाद कर लेनी चाहिये, जब पत्तियाँ धीरे-धीरे पीली होकर सूखने लगें। खुदाई से देरी करने पर प्रकन्दों की गुणवत्ता और भण्डारण क्षमता में गिरावट आ जाती है तथा भण्डारण के समय प्रकन्दों का अंकुरण होने लगता हैं। 

Related posts

Leave a Comment