कृषि पिटारा

पूसा के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह – आलू, टमाटर और अन्य फसलों के रोगों के खिलाफ सतर्क रहें किसान

नई दिल्ली: पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने आलू और टमाटर जैसी मुख्य फसलों में झुलसा रोग के बढ़ते प्रबल खतरे के बारे में चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसलों को शीतलहर जुड़े खतरे से बचाने के लिए नियमित निगरानी करें और यदि कोई लक्षण पाए जाएं तो उचित उपायों को अपनाने में बिलकुल भी देरी ना करें। आलू और टमाटर में झुलसा रोग के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि अगर आपको इन रोगों के लक्षण दिखाई देते हैं, तो कार्बेंडाजिम 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में या डाईथेन-एम-45 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग के प्रति प्रतिरक्षा में मदद मिलेगी और फसल को सुरक्षित रखने में मदद होगी।

इसके अलावा प्याज, गोभीवर्गीय फसलें और गेहूं की फसल को लेकर भी कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है। इन फसलों पर हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक और टमाटर में फल छेदक कीटों का हमला हो सकता है। इसके लिए फीरोमोन ट्रैप्स का उपयोग करने का सुझाव दिया जा रहा है। इसके लिए प्रति एकड़ खेत में 3 से 4 ट्रैप्स लगाने से काफी मदद मिल सकती है। कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी बताया है कि गेहूं के खेतों में दीमक का प्रकोप हो तो किसान क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 2 लीटर प्रति एकड़ 20 किलोग्राम बालू में मिलाकर खेत में छिड़काव करें और सिंचाई करें। इससे दीमक के खिलाफ सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी और फसल को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसम में सभी किसानों को अपनी फसलों की निगरानी को लेकर जागरूक रहना चाहिए और उन्हें इन सुझावों का अधिकतम लाभ उठाने का प्रयास करना चाहिए। वैसे उपरोक्त रोगों से प्रभावित होने पर किसानों को अपने निकतम कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना चाहिए तथा वैज्ञानिकों की सलाह के बाद उपरोक्त उपायों पर अमल करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

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