कृषि पिटारा

गेहूं की अच्छी उपज के लिए कृषि मंत्रालय की सलाह

नई दिल्ली: कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादक किसानों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें विभिन्न कदमों की सलाह दी गई है। इस एडवाइजरी के मुताबिक, गेहूं की अच्छी उपज के लिए किसानों को अपने खेत की नियमित जाँच करते रहने की सलाह दी गई है। अगर खेत में किसी भी प्रकार की खराबी दिखाई दे, तो उसे निकालकर फेंक देने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, गेहूं की बुआई के 40-45 दिन बाद खेत में नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग बंद करने की सलाह दी गई है। साथ ही, गेहूं की सिंचाई से पहले जमीन में यूरिया डालने की सलाह भी दी गई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, देर से गेहूं की बुआई करने पर खेत में संकरी और चौड़ी पत्ती वाले खर-पतवार उग आते हैं। इसलिए, इस साल देर से बुआई की गई है तो खेत में शाकनाशी का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में बताया गया है कि किसान अपने खेत में शाकनाशी सल्फोसल्फ्यूरॉन 75डब्ल्यूजी या सल्फोसल्फ्यूरॉन प्लस मेटसल्फ्यूरॉन 16 ग्राम को 120-150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसका छिड़काव पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के 10-15 दिन बाद करना चाहिए।

पीला रतुआ रोग से बचाव के लिए भी कृषि मंत्रालय ने किसानों को सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि किसानों को नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करना चाहिए। अगर गेहूं के खेत में पीला रतुआ रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, तो संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से हटा देना चाहिए, ताकि यह अन्य पौधों को संक्रमित न करें। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस साल 2023-24 में कुल 336.96 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा बुआई उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में हुई है। कृषि मंत्रालय को उम्मीद है कि इस साल गेहूं की अच्छी उपज होगी, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई पर कुछ हद तक ब्रेक लग सकता है।

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