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औषधीय पौधों की खेती को सरकार कर रही है प्रोत्साहित, इस फसल की खेती से आप भी कर सकते हैं शुरुआत

नई दिल्ली: औषधीय पौधों में लेमन ग्रास एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी पत्तियाँ चाय में डालने हेतु उपयोग में लाई जाती हैं। इस पौधे से निकलने वाले तेल की बाजार में बहुत मांग है। लेमन ग्रास से निकले तेल से कॉस्मेटिक्स, साबुन, तेल और कई दवाइयाँ बनती हैं। इस वजह से किसानों को लेमन ग्रास का अच्छा भाव मिल रहा है।

लेमन ग्रास को एक बार लगा देने के बाद 5 वर्षो तक फसल प्राप्त जा सकती है। आज कल लेमन ग्रास की विधिवत खेती केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आसाम, पश्चि्मी बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र आदि राज्यों में हो रही है। इसकी खेती जल जमाव वाले क्षेत्रों को छोड़कर लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है। उष्ण तथा समशीतोष्ण जलवायु लेमन ग्रास की खेती के लिए उपयुक्त रहती है।

इसकी कई बेहतर किस्में हैं, जैसे – प्रगति, प्रमाण, कावेरी, कृष्णा, आर.एल.एल.-16, जी.आर.एल.-1 इत्यादि। जहाँ तक बात है खेत की तैयारी की तो इस समय भूमि की अच्छी तरह जुताई बहुत ज़रूरी है। इसके लिए खेत की आड़ी-तिरछी जुताई करनी चाहिए। आखिरी जुताई के समय 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बी.एच.सी. पाउडर मिलाने के बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए। इस समय खेत में गोबर की खाद मिलाने से काफी अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।

अगर आपके पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा है तो गर्मी के समय को छोड़कर लेमनग्रास की बिजाई वर्ष में कभी भी की जा सकती है। लेकिन इसकी बिजाइ का सबसे अच्छा समय फरवरी-मार्च तथा जुलाई-अगस्त है। एक बार जम जाने के बाद लेमनग्रास को ज्यादा पानी की आवश्यकता नही होती है परन्तु जमीन गीली रहे इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। प्राय: गर्मियों में 10-10 दिन तथा सर्दियों में 15-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना फसल की उचित वृद्धि के लिए उपयुक्त है।

पहली बिजाई के 100 दिनों के बाद लेमन ग्रास की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कटाई करते समय फसल की सतह से 10-15 सेंटीमीटर ऊपर से कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद फसल की बढ़वार फिर से शुरू हो जाती है और अगले 60-90 दिनों में फिर से कटाई के लिए तैयार हो जाती है। वर्ष में लेमन ग्रास की औसतन 4-5 बार कटाई की जा सकती है।

लेमन ग्रास की खेती से प्रति एकड़ एक कटाई में लगभग पाँच टन तक पत्तियाँ निकलती हैं। पांच टन की पत्तियों से लगभग 25 लीटर तक तेल निकाला जा सकता है। ऐसे में साल भर में पाँच कटाई से लगभग 100 से 125 लीटर तेल की प्राप्ति हो सकती है। अगर एक लीटर तेल 1200 से 1300 रुपये प्रति लीटर बिके तो भी किसान को तकरीबन एक से सवा लाख रुपए तक का मुनाफा आसानी से हो सकता है।

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