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औषधीय फसलों की खेती को इन राज्यों में प्रोत्साहित कर रही है केंद्र सरकार

नई दिल्ली: अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए आजकल काफी किसान औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं। लेकिन काफी समय से इन फसलों की खेती को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। इसकी वजह कई औषधीय पौधे अब लुप्त होने की कगार पर पहुँच गए हैं। काफी किसान इस वजह से भी औषधीय फसलों की खेती करने से सकुचाते हैं कि उन्हें इनके खरीदारों व उपयुक्त बाज़ार के बारे में समुचित जानकारी नहीं है। लेकिन आपको बता दें कि इन दिनों औषधीय फसलों और जड़ी बूटियों को खरीदने के लिए कई कंपनियां और फार्मेसियां मौजूद हैं। यदि थोड़ा बहुत भी प्रयास किया जाए तो औषधीय पौधों की बिक्री की समस्या बहुत आसानी से हल हो सकती है।

औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार भी अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश में लुप्त हो रही 70 औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है। इनके अलावा 130 प्रकार की अन्य औषधीय फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। हिमाचल के चंबा, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, शिमला और किन्नौर जिले में औषधीय फसलों की खेती होगी। हिमाचल के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में भी औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन्हें उगाने के लिए केंद्र सरकार बीज के अलावा इनकी खेती पर आने वाले खर्च का 50 प्रतिशत खर्च खुद वहन करेगी।

केंद्र सरकार औषधीय पौधों के बीज नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के जरिये उपलब्ध कराएगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जब ये पौधे तैयार हो जाएंगे तो इन्हें किसानों से कंपनियां सीधे खरीदेंगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए आयुर्वेदिक औषधीय निर्माता संघ के साथ करार किया है। किसानों की अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए जाएं, इसकी जिम्मेदारी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्रों की होगी।

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