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औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं तो इस फसल की खेती में आजमाएँ हाथ

नई दिल्ली: औषधीय फसलों की खेती से किसानों को आजकल काफी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। जबकि, कुछ किसान जानकारी के अभाव में अब भी इन फसलों की खेती से दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन, जिन किसानों ने एक बार सफलतापूर्वक औषधीय फसलों की खेती कर ली है, वो अब इन्हें भरपूर तरजीह दे रहे हैं। आज के समय में एक औषधीय फसल की खेती करने के लिए काफी किसान आकर्षित हो रहे हैं, उसका नाम है – गुड़मार। क्योंकि इसमें उन्हें उम्मीद के अनुसार मुनाफा मिल रहा है।

गुड़मार में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसके पत्ते डाइबिटीज़ को नियंत्रित करने में बहुत ही कारगर होते हैं। इसके अलावा ये लिवर के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसलिए बाज़ार में इसकी भरपूर मांग बनी हुई है। यह एक बेलनुमा पौधा है। इस पर पीले फूलों के गुच्छे लगते हैं। इसकी पत्तियां 5 से 7 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। गुड़मार की की खेती करने वाले किसानों के पास इसे निर्यात करने का भी विकल्प मौजूद है। जी हाँ, पिछले कुछ वर्षों से इसके निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है।

गुड़मार को देश के किसी भी किसी भी क्षेत्र में उगाया जा सकता है। यह हर प्रकार की मिट्टी में बड़ी आसानी से उग जाता है। वैसे गुड़मार की खेती के लिए हल्की दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। इसलिए अगर आपके पास ऐसी भूमि उपलब्ध है तो अच्छी बात है अन्यथा, आप किसी भी भूमि में इसकी खेती शुरू कर सकते हैं। फिलहाल गुड़मार की खेती जंगलों से एकत्रित किए गए पौधों से ही की जा रही है। लेकिन इसे बीज व कलम, दोनों प्रकार से लगाया जा सकता है।

गुड़मार की खेती के लिए इसके ताजा बीज जनवरी में एकत्रित किए जा सकते हैं। इसके बाद नर्सरी में 10 गुणे 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जा सकता है। बीजों को लगाने के लगभग एक सप्ताह के बाद उनमें अंकुरण होने लगता है। जब नर्सरी में पौधों की ऊंचाई 15 सेंटीमीटर हो जाए, तो उन्हें पॉलीथिन में लगा देना चाहिए। साथ ही सहारे के लिए बांस आदि की भी व्यवस्था करनी चाहिए।

अगर आप गुड़मार की कलम लगाना चाहते हैं इसके लिए फरवरी से मार्च व सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे बेहतर होगा। जहां तक बात है गुड़मार की फसल को खाद देने की तो इसे जैविक खाद के तौर पर आप 5 टन प्रति एकड़ की दर से गोबर की सड़ी हुई खाद दे सकते हैं। यह फसल के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगी। गुड़मार की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। आप गर्मियों में 15 दिनों के अंतराल पर और सर्दियों में 25 दिनों के अंतराल पर खेत की सिंचाई कर सकते हैं।

गुड़मार के पत्तों की औसत उपज प्रति एकड़ में 10 से 12 क्विंटल तक हो सकती है। इसके पत्ते हर साल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं, जिनकी तुड़ाई अक्टूबर से फरवरी महीने तक की जा सकती है। पत्तों को तोड़ने के बाद उन्हें साफ कर किसी छायादार स्थान पर सुखाना चाहिए। गुड़मार की जड़ें भी औषधी के तौर पर प्रयोग में लाई जाती हैं। इसलिए इसकी जड़ों को अप्रैल से मई के दौरान उखाड़ना चाहिए। इसके बाद उन्हें धोकर और साफकर छोटे-छोटे भागों में बांटकर सुखाना चाहिए। फिर उन्हें प्लास्टिक के थैलों में रखना चाहिए। बेहतर होगा कि इस औषधीय फसल की खेती शुरू करने से पहले आप खरीदार की तलाश कर लें, ताकि उचित समय पर उनकी बिक्री की जा सके।

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