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औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं तो ईसबगोल की खेती है एक बेहतर विकल्प

नई दिल्ली: विश्व का अस्सी प्रतिशत ईसबगोल भारत में पैदा होता है। इसका उपयोग विभिन्न चिकित्सीय पद्धतियों के अलावा पशुओं व मुर्गियों के आहार के रूप में किया जाता है। अगर आप ईसबगोल की खेती करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि आपके क्षेत्र की मिट्टी व जलवायु इस खेती के लिए अनुकूल है या नहीं। अगर आपके क्षेत्र में ईसबगोल की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है तो इसकी खेती के लिए दोमट, बलुई मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, का चुनाव करें। इस फसल के लिए ठंडी व शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच का तापमान व मिट्टी का पीएच मान 7-8 सर्वोत्तम होता है। साफ, शुष्क, और खुली धूप वाला मौसम इस फसल के पकाव अवस्था के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि पकाव के समय वर्षा होने पर ईसबगोल के बीज झड़ जाते हैं। इससे फसल की गुणवत्ता व पैदावार दोनों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।

जहां तक बात है ईसबगोल की कुछ उन्न्त किस्मों की तो आप अपने क्षेत्र की संस्तुति के अनुसार किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। गुजरात ईसबगोल 2, आर॰ आई॰ 89, आर॰ आई॰-1, जवाहर ईसबगोल 4, निहारिका और मंदसौर आदि किस्में अच्छी पैदावार देने के लिए किसानों के बीच काफी प्रसिद्ध हैं।

ईसबगोल की खेती के लिए खरीफ फसल की कटाई के बाद भूमि की दो से तीन बार अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। इसके बाद मिट्टी जनित रोग से फसल को बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा विरिड की एक किलो मात्रा को एक एकड़ खेत में 100 किलो गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई के साथ मिट्टी में मिला दें। अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद ईसबगोल की खेती के लिए लाभकारी होती है। इसलिए आखरी जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद भी मिट्टी में ज़रूर मिलाएं।

ईसबगोल के पौधों में 60 दिनों के बाद बालियां निकलनी शुरू हो जाती हैं और करीब 115 से 130 दिन में फसल पक कर तैयार हो जाती है। पकने पर फसल सुनहरी पीली और बालियां गुलाबी-भूरी हो जाती हैं। इस अवस्था में बालियों को अंगूठे और उंगलियों के बीच हल्का सा दबाने पर बीज बाहर निकलने लगते हैं। जब मौसम एकदम सूखा व साफ हो तब फसल को एकदम नीचे से या जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है। इसके बाद पौधों को बड़े-बड़े कपड़ों में बांधकर खलिहान में फैला दिया जाता है। दो-तीन दिन बाद डंडे से पीटकर या ट्रैक्टर से गहाई कर आप ईसबगोल को भंडारण या बिक्री के लिए तैयार कर सकते हैं।

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