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भिंडी की खेती से कमाना है अच्छा मुनाफा तो अपनाएँ ये तरीके

नई दिल्ली: भिंडी में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इससे काफी सारे स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। इसलिए बाज़ार में हमेशा इसकी अच्छी मांग रहती है। भिंडी की खेती के साथ एक अच्छी बात ये है कि इसके उत्पादन में बहुत अधिक लागत नहीं आती है। भिंडी उत्पादन के मामले में भारत विश्व भर में पहले स्थान पर है। हरियाणा,पंजाब बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और आसाम आदि राज्यों में भिंडी प्रमुखता से उगाई जाती है। भारत में लगभग 490 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में भिंडी की खेती की जाती है। इससे प्रतिवर्ष लगभग 5830 हजार टन भिंडी का उत्पादन प्राप्त होता है।

अगर आप भी भिंडी की खेती कर रहे हैं या फिर भविष्य में करना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखकर इसकी पैदावार और अपने मुनाफे को बढ़ा सकते हैं:

भिंडी के बीजों को जनवरी के प्रथम सप्ताह में अंकुरित करके खेतों में बो दें।

अमूमन भिंडी की बुआई फरवरी-मार्च में की जाती है। लेकिन मौसम आदि को ध्यान में रखते हुए आप भिंडी की बुआई जनवरी के पहले सप्ताह में ही कर दें। इससे आपकी फसल आपके क्षेत्र में सबसे पहले तैयार हो जाएगी। इससे आपको भिंडी का अच्छा दाम मिलेगा। और लागत के मुक़ाबले आपको काफी अच्छा मुनाफा मिलेगा।

भिंडी की बुआई का समय फरवरी से शुरू हो जाता है। ऐसे में आप बाजार से उस प्रजाति का बीज खरीदें जो जल्दी तैयार हो सके और गर्मी-बरसात दोनों ही मौसमों में अच्छी उपज दे सके।

अगर आप भिंडी की जल्दी बुआई करेंगे तो आपकी फसल मार्च में तैयार हो जाएगी। फसल तैयार होते ही आप उन्हें तोड़ लें। फिर जून के महीने में भिंडी के पौधों को जड़ से चार-पांच इंच छोड़कर उसकी कलम कर दें।

थोड़े दिन बाद जब बरसात शुरू होगी तब कलम किए गए पौधों में फिर से कल्ले निकल आएंगे। दोबारा निकले हुए कल्लो में 40 से 45 दिनों में ही सब्जी प्राप्त होने लगती है। इस तरह आप एक बार बीज की बुआई कर दोबारा फसल काट सकेंगे। इससे खाद-पानी और बीज पर आने वाली आपकी लागत आधे से भी कम हो जाएगी और मुनाफा चार गुना हो जाएगा।

आज के समय में भिंडी की कुछ ऐसी किस्में भी आ गई हैं, जो ग्रीष्मकालीन और वर्षाकालीन दोनों ही ऋतुओं में बढ़िया उपज देती हैं। भिंडी की ये किस्में हैं – काशी शक्ति, काशी विभूति और काशी प्रगति। जहाँ तक हो सके अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म के बीजों का चुनाव करें।

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