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बिहार: दो योजनाओं को जोड़कर श्रमिकों को दिया जाएगा रोजगार

पटना: कोरोना महामारी के बढ़ते प्रसार को देखते हुए 25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। लॉकडाउन की वजह से तमाम कल-कारखाने बंद हो गए। शहरों में काम न होने की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने-अपने राज्य वापस लौट गए। उन तमाम श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था करना विभिन्न राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार भी प्रयास कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 20 जून को गरीब कल्याण रोजगार अभियान की घोषणा की गई थी। इसके तहत मजदूरों को 125 दिनों तक अलग अलग क्षेत्रों में रोजगार मुहैया कराया जाएगा। सरकार ने इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।

अन्य राज्यों से बिहार वापस लौटे श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार ने केंद्र सरकार के गरीब कल्याण रोजगार अभियान से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को जोड़ दिया है। चूँकि राज्य में फिलहाल सड़कों का निर्माण कार्य जारी है, इसलिए श्रमिकों को इस काम में लगाया जा रहा है।

विभाग का मानना है कि इससे गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत बड़ी संख्या में मजदूरों को काम मिल सकेगा। विभाग की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि इस अभियान के तहत अधिक से अधिक मजदूरों को सड़क निर्माण के कार्य में लगाया जाए। इसके लिए सभी ठेकेदारों को आवश्यक निर्देश दिये गए हैं।

बताते चलें कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पहले चरण में 1200 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य अभी भी जारी है। इसके अलावा इस योजना के तहत 550 पुलों के निर्माण का भी कार्य हो रहा है। इन सभी कार्यों में करीब 5 लाख से अधिक मजदूर कार्य दिवस सृजित होंगे।

इसके अलावा अभी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दूसरे फेज में 2465 किलोमीटर सड़कों के अपग्रेडेशन का काम भी चल रहा है। इसमें से अभी तक सिर्फ 35 किलोमीटर सड़कों के अपग्रेडेशन का काम पूरा हो पाया है। अपग्रेडेशन का बाकी बचा काम अगले साल मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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