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कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत् ऐसे शुरू करें नींबू वर्गीय फलों की खेती

नई दिल्ली: नींबू वर्गीय फलों के खेती कर कई अन्य फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है। स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और कई औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण नींबू वर्गीय फलों की मांग हमेशा बनी रहती है। इस वजह से किसानों को इन फलों की खेती से बढ़िया मुनाफा मिलता है।

अगर आप नींबू वर्गीय फलों की खेती करना चाहते हैं तो इसके लिए भूमि का चयन कर सबसे पहले खेत को समतल बना लें। अगर आप पहाड़ी इलाकों में इन फलों की खेती करना चाहते हैं तो ढलाई के खिलाफ पौधरोपण करें। हल्की और बलुई दोमट मिट्टी नींबू वर्गीय फलों की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती हैं। जिन क्षेत्रों में सर्दी ज्यादा पड़ती है और पाला का असर ज्यादा दिन रहता है, उन इलाकों में नींबू वर्गीय फलों की खेती नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इन फलों की खेती के लिए सामान्य स्तर का कम तापमान अधिक पैदावार पाने में मददगार साबित होता है। जबकि जरूरत से अधिक ठंड उपज को नुकसान पहुंचाती है। दिन और रात के तापमान में अगर ज्यादा बदलाव न हो तो फलों के अच्छे रंग आते हैं और उनकी गुणवत्ता में भी निखार आता है।

किसान मित्रों, नींबू वर्गीय फलों की खेती के लिए सिंचाई की अच्छी सुविधा जरूरी है। इन्हें नियमित रूप से पानी की जरूरत पड़ती है। गर्मी के मौसम में पौधों को 4 से 7 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। इससे पौधों की जड़ों के पास नमी बरकरार रहती है। अगर मौसम उपयुक्त हो और जड़ों में पानी की कमी नहीं हो तो आप 10 से 15 दिन के अंतर पर भी सिंचाई कर सकते हैं।

नींबू वर्गीय फलों के बाग में समय पर निराई-गुड़ाई भी आवश्यक है। खर-पतवार उपज को प्रभावित न करें, इसके लिए बाग में साफ-सफाई पूरा ध्यान रखना चाहिए। इन फलों में कीट लगने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में विभिन्न कीटों से बचाव के लिए आप पौधों पर जैविक कीटनाशकों का छिड़काव कर सकते हैं। साथ ही पौधों को गर्मी और धूप से बचाने के लिए पर्याप्त प्रबंधन आवश्यक हैं। क्योंकि अधिक गर्मी के कारण फलों की बढ़वार रुक जाती है और वे गिरने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आप कृषि विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।

जब नींबू वर्गीय फल पूरी तरह से तैयार हो जाएँ तो आप उन्हें सीधे बाजार में या व्यापारी को बेच सकते हैं। अगर आपके पास संसाधन हैं तो आप इनकी प्रोसेसिंग भी कर सकते हैं। इससे आपकी आमदनी में और भी बढ़ोतरी होगी। कुछ कंपनियां सीधे किसानों से फलों की खरीद करती हैं तो कुछ किसानों से शुरू में ही बात कर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराती हैं। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने से किसानों को एक तय रकम मिल जाती है। इससे उनको कई प्रकार के जोखिमों से राहत मिल जाती है। आप चाहें तो नींबू वर्गीय फलों की खेती शुरू करने से पहले किसी खरीददार से मिलकर इनकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी शुरू कर सकते हैं।

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