कृषि पिटारा

गेहूं की नई किस्म ‘करण वंदना’ से किसानों को हो रहे हैं कई फायदे

नई दिल्ली: हमारे देश में फिलहाल रवि सीजन चल रहा है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में एक नया तथा उद्यमी चरण शुरू हो चुका है। खासकर किसान, जो अपनी फसलों की बुआई में तत्पर हैं और इस समय तेजी से गेहूं की बुआई कर रहे हैं। इससे कुछ बाजारों में गेहूं के बीज महंगे हो रहे हैं। हालांकि, इस समस्या का समाधान प्रधान कृषि कार्यालय के द्वारा प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी दर पर बीज की बिक्री शामिल है। यह काफी सस्ता और उच्च गुणवत्ता का है।

किसानों के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में प्रकट होने वाले ‘करण वंदना’ (DBW 187) गेहूं की खोज की गई है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के उत्तर पूर्वी मैदानी इलाकों में विकसित हो रही है। इसकी पैदावार मौसमी बदलावों के प्रति प्रतिरोधी है और इसमें अच्छी प्रतिरक्षा क्षमता है। ‘करण वंदना’ में बुआई के 77 दिन बाद फूल आते हैं और 120 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन लगभग 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो किसानों को अच्छी कमाई का मौका देता है। इसमें विशेष रूप से उच्च प्रोटीन (12% से अधिक) और लौह की मात्रा (42% से अधिक) होती है, जिससे खाद्य सुरक्षा में मदद हो सकती है।

इस गेहूं के बीजों पर आधिकारिक तौर पर 50% की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे किसानों को सस्ते में बीज प्राप्त हो रहे हैं। बाजार में इसकी कीमत 42 रुपये प्रति किलो है, जबकि सब्सिडी योजना के तहत यह 22 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है। किसान इसे अपने नजदीकी प्रखंड कृषि कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। इस नई गेहूं की खोज के विकास के पीछे एक मुख्य उद्देश्य था, जिससे किसानों को तकनीकी तरीके से उन्नत बीज प्रदान किए जा सकें ताकि उन्हें अधिक उत्पादन प्राप्त हो और इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा में भी वे सहारा बनें।

इस किस्म की खोज में संलग्न वैज्ञानिकों ने इसे ‘ब्लास्ट’ बीमारी के खिलाफ भी सुरक्षित बनाया है, जो किसानों के लिए एक और सुरक्षा की गारंटी प्रदान करता है। गेहूं की इस किस्म का संग्रहण और बुआई की सही प्रक्रिया के साथ, यह किसानों को एक नई सुरक्षित और उपयुक्त बीज विकल्प प्रदान कर रहा है। ‘करण वंदना’ की खोज का एक और महत्वपूर्ण पहलु है कि यह प्रतिपूर्ण उत्पादन क्षमता के साथ किसानों को अधिक आय प्राप्त करने में मदद कर रहा है।

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