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आम बजट 2022-23 में कृषि क्षेत्र के लिए क्या कुछ है?

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में आम बजट 2022-23 प्रस्तुत कर दिया। इसके साथ ही विभिन्न वर्गों की उम्मीदों की वह तस्वीर साफ हो गई जो आम बजट से जुड़ी हुई थी। इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं, यह जानने के लिए सभी किसान उत्सुक हैं। आम बजट 2022-23 में किसानों के हित में काफी वादे किए गए हैं। हालाँकि इन वादों में कितनी सच्चाई है और इनसे किसानों को सीधे तौर पर कितना लाभ होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

इस बजट में रासायनिक खेती की जगह पर प्राकृतिक या जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। योजना के शुरुआती चरण में गंगा नदी से सटे पांच किलोमीटर चौड़े गलियारे के अंतर्गत आने वाली भूमि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस संबंध में वित्त मंत्री ने कहा है कि, “सरकार गंगा नदी के किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। देशभर में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। लेकिन प्रथम चरण में गंगा नदी के किनारे 5 किलोमीटर चौड़े गलियारे में इस तरह की खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।”

इस बजट में किसानों के लिए डिजिटल हाइटेक सेवाएं शुरू करने का भी प्रावधान किया गया है। इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, “पीपीपी मोड में एक नई योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत् किसानों को डिजिटल और हाइटेक सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान व विस्तार संस्थाओं के साथ-साथ निजी कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियां व कृषि मूल्य श्रृंखला के हितधारक शामिल होंगे।”

कृषि क्षेत्र में स्टार्ट-अप व्यवस्था पर जोर देते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि, “सह-निवेश मॉडल के अंतर्गत सृजित मिश्रित पूंजीयुक्त कोष के लिए नाबार्ड से सहायता प्रदान की जाएगी। इस कोष का उद्देश्य कृषि उत्पाद मूल्य श्रृंखला के लिए उपयुक्त कृषि और ग्रामीण उद्यमों से संबंधित स्टार्ट-अप्स का वित्त पोषण करना होगा। इन स्टार्ट-अप्स के क्रियाकलापों में अन्य बातों के अलावा किसानों को फॉर्म स्तर पर किराये के आधार पर विकेन्द्रीकृत मशीनरी उपलब्ध कराना, एफपीओ के लिए आईटी आधारित सहायता उपलब्ध कराना जैसे कार्य शामिल होंगे।”

केंद्र सरकार ने इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। इस संबंध में वित्त मंत्री ने कहा कि, “कृषि फसलों का आकलन करने, भूमि दस्तावेजों का डिजिटीकरण करने, कीटनाशकों और पोषक तत्वों का छिड़काव करने के लिए ‘किसान ड्रोन्स’ के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।”

आम बजट 2022-23 के लक्ष्यों के तहत् राज्यों को अपने कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में संशोधन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे प्राकृतिक, जीरो-बजट और जैविक कृषि, आधुनिक कृषि, मूल्य संवर्धन एवं प्रबंधन की जरूरतों को पूरा कर सकें।

इस बजट में फसल के उपरान्त मूल्य संवर्धन, घरेलू खपत को बढ़ाने तथा मोटे अनाज उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड्रिंग करने के लिए प्रावधान किया गया है। साथ ही तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समग्र योजना के कार्यान्वयन की घोषणा की गई है। इस बारे में वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि, “तिलहनों के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से एक तर्कसंगत और व्यापक योजना लागू की जाएगी।”

आम बजट के एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत् रबी 2021-22 में गेहूं की खरीद व खरीफ 2021-22 में धान की अनुमानित खरीद में 163 लाख किसानों से 1208 लाख मीट्रिक टन गेहूं एवं धान की खरीद की जाएगी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य के 2.37 लाख करोड़ रुपए का भुगतान सीधा किसानों के खाते में किया जाएगा।

इन तमाम घोषणाओं के अलावा 44,605 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से केन-बेतवा लिंक परियोजना को लागू किया जाएगा। इससे 9.08 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

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