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इन अनुकूल परिस्थितियों में की जा सकती है गाजर की खेती, अच्छी पैदावार के लिए इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली: सब्जियों की खेती करने वाले किसान गाजर की खेती से बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। गाजर की खेती सब्जियों की मिश्रित कृषि करने वाले किसान भी कर सकते हैं। यह एक प्रकार की एकवर्षीय या दो वर्षीय फसल है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश गाजर उगाने वाले प्रमुख राज्य हैं। इन राज्यों की मिट्टी व जलवायु गाजर की खेती के लिए अनुकूल है।

गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी उपयुक्त होती है। बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजर की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है। इसकी अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का पी एच मान 5.5 से 7 बीच होना चाहिए। गाजर की खेती के लिए उपयुक्त किस्मों का चुनाव अपने क्षेत्र की अनुकूलता के अनुसार करना चाहिए। कुछ यूरोपियन किस्मों के अलावा पूसा केसर, पूसा मेघली और न्यू कुरोडा गाजर की कुछ उन्नत किस्में हैं। इनसे सामान्यतः अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

गाजर की देसी किस्मों की बिजाई के लिए अगस्त-सितंबर का समय सही माना जाता है, जबकि यूरोपियन किस्मों के लिए अक्तूबर-नवंबर का महीना उपयुक्त होता है। किसान मित्रों, गाजर की बिजाई के समय पंक्ति से पंक्ति के बीच 45 से.मी. और पौधे से पौधे के बीच 7.5 से.मी. का फासला बरकरार रखें। साथ ही फसल के अच्छे विकास के लिए बीजों को 1.5 से.मी. की गहराई में बोएँ। जहाँ तक बीज की मात्रा का सवाल है तो प्रति एकड़ 4 से 5 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करें। बेहतर होगा कि आप बिजाई से पहले बीजों को 12-24 घंटे तक पानी में भिगो दें। इससे बीजों के अंकुरण में वृद्धि होगी।

गाजर को आमतौर पर तीन से चार सिंचाइयों की जरूरत होती है। इस फसल को ज्यादा सिंचाई देने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के गलने की संभावना रहती है। साथ ही गाजर की कटाई के दो या तीन हफ्ते पहले सिंचाई रोक देनी चाहिए। इससे गाजर की मिठास और स्वाद में वृद्धि होती है। किस्मों के आधार पर बिजाई के 90-100 दिनों के बाद गाजर की कटाई की जाती है। इसकी कटाई हाथों से पौधों को जड़ों सहित उखाड़कर की जाती है।

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