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इस समय गन्ने की फसल पर हो सकता है इन रोगों का हमला, ऐसे करें बचाव

नई दिल्ली: गन्ने की खेती यदि अच्छी तैयारी के साथ की जाए तो इसमें काफी अच्छा मुनाफा है। गन्ने की खेती दोमट मिट्टी, जिसमें 12 से 15 प्रतिशत मृदा नमी मौजूद हो अच्छे फसल की जमाव के लिये उपयुक्त मानी जाती है। यदि मृदा नमी में कमी हो तो इसे बुवाई से पूर्व पलेवा करके पूरा किया जा सकता है। इसके लिए ओट आने पर मिट्टी पलटने वाले हल से एक गहरी जुताई तथा 2-3 उथली जुताइयाँ करके खेत में पाटा लगा देना चाहिये।

गन्ने की बुआई करते समय सामान्यत: पंक्ति से पंक्ति के मध्य 90 सेमी दूरी रखने एवं तीन आंख वाले टुकड़े बोने पर लगभग 37.5 हजार टुकड़े अथवा गन्ने की मोटाई के अनुसार 40 से 60 कुन्तल बीज गन्ना प्रति हेक्टयर की दर से प्रयोग किया जाता है। पंक्तियों के मध्य की दूरी 60 सेमी रखने तथा तीन आंख वाले टुकड़े लेने पर इनकी संख्या लगभग 56.25 हजार प्रति हेक्टयर हो जाती है।

सामान्यत: स्वीकृत पौधशालाओं से संस्तुत उन्नतशील गन्ना प्रजातियों का रोग व कीटमुक्त, शत-प्रतिशत शुद्ध 12 माह की आयु की फसल से बीज का चुनाव किया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि गन्ने के 1/3 ऊपरी भाग का जमाव अपेक्षाकृत अच्छा होता है तथा 2 माह की फसल की तुलना की में 7-8 माह की फसल से लिये गये बीज का जमाव भी अपेक्षाकृत अच्छा होता है। बोने से पूर्व गन्ने के दो अथवा तीन आँख वाले टुकड़े काटकर कम से कम 2 घण्टे पानी में डुबो लेना चाहिये, इसके बाद किसी पारायुक्त रसायन (एरीटान 6 प्रतिशत या बैगलाल 3 प्रतिशत) के क्रमश: 0.25 या 0.5 घोल में शोधित कर लेना चाहिये। बीज शोधन के लिये बावस्टीन 0.1 प्रतिशत घोल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

गन्ने की फसल में कई प्रकार के रोगों के आक्रमण का खतरा बना रहता है। इनमें से कुछ प्रमुख रोग इस प्रकार हैं:

लाल सड़न रोग: गन्ने की बुवाई से पहले बीज को किसी पारायुक्त कवकनाशी जैसे एगलाल या एरिटान के 0.25 प्रतिशत घोल से उपचार करें। प्रभावित पौधों को खेत से बाहर निकालकर जला देना। इसके अलावा प्रभावित फसल की पेड़ी न लें।

कण्डुआ रोग: इस रोग का कोई रासायनिक उपचार मौजूद नही है। इससे बचाव के लिए सबसे कारगर उपाय ये है कि बुआई के लिए कण्डुआ रहित बीज का प्रयोग करें।

बिज्ट: बुवाई से पहले 0.25 प्रतिशत एगलाल या एरिटान के घोल से बीज का उपचार। इसके अलावा प्रभावित फसल की पत्तियों एवं जड़ों को जलाकर नष्ट कर दें।

ग्रासीसूट: इस रोग से गन्ने की फसल को बचाने के लिए गन्ने की अवरोधी प्रजातियों का चयन करें।

रैट्न स्टन्टिंग: किसान मित्रों इस रोग से बचाव के लिए हमेशा गन्ने के स्वस्थ्य बीज का उपयोग करें। ऐसा करने से गन्ने की फसल को रैट्न स्टन्टिंग रोग से ग्रसित होने का खतरा काफी कम जाएगा।

पोक्का बोईंग रोग: यह एक बीज जनित बीमारी है। इसमें गन्ने के खेतों में कुछ झुण्डों में अत्यधिक ब्यांत हो जाती है जिसके कारण गन्ने का झुण्ड व्यात की तरह दिखाई देता है। यह रोग किसी भी रसायन से ठीक नही होगा। इसलिए ऐसे झुण्डों को तत्काल उखा़गकर नष्ट कर दें। साथ ही गन्ने की बिजाई करते समय ऐसे झुण्डों के गन्नों को निकाल कर अलग कर दें।

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