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गन्ने की खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं तो करें पछेती किस्मों का चुनाव

नई दिल्ली: अगर आप कृषि के जरिये अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं तो आपको कुछ व्यावसायिक फसलों की भी खेती करनी होगी। गन्ना एक ऐसी व्यावसायिक फसल है जिसमें लागत के मुकाबले काफी अच्छा मुनाफा है। इस वजह से व्यावसायिक फसलों में गन्ने का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। गन्ने की खेती के लिए गर्म जलवायु अच्छी मानी जाती है। सामान्यतः उत्तर भारत के सभी राज्यों की जलवायु इस फसल की खेती के लिए अनुकूल है। गन्ने के अच्छे विकास के लिए 26-32 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उपयुक्त होता है। इसकी खेती के लिए मध्यम से काली कछारी व चिकनी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती हैं।

किसी भी फसल से बढ़िया मुनाफा पाने के लिए वैसी किस्मों का चुनाव करना बेहतर होता है, जो समय से पहले या बाद में तैयार हों, जब उनके लिए बाजार में मांग अपने शीर्ष पर हो। इस लिहाज से गन्ने की अगेती या पछेती किस्मों की बुआई करना एक बढ़िया सौदा होगा। अगर आप गन्ने की पछेती किस्मों की बुआई करना चाहते हैं तो आपको इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। इनपर अमल कर आप गन्ने की पछेती बुआई से अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं:

गन्ने की पछेती बुआई के लिए खेत की तैयारी करते समय पलेवा के बाद खेत की 3 से 4 जुताई करें।
जहां तक बात है गन्ने की उपयुक्त क़िस्मों की तो इसका चुनाव आप अपने क्षेत्र की मिट्टी व जलवायु के अनुसार करें। प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश के किसान इन क़िस्मों का चुनाव कर सकते हैं, ये किस्में हैं – को0शा0 767, 88216, 88230, 95255, 94257 व को0शा0 94270

गन्ने की पछेती बुआई करते समय हमेशा स्वस्थ गन्ने का ऊपरी भाग बोएँ।
गन्ने के बीज बोने से पहले उन्हें 4 से 6 घण्टे तक पानी में भिगोकर तथा पारायुक्त रसायन में डुबोकर रखें। इसके बाद ही इनकी बुआई करें।

गन्ने की पंक्तियों के बीच 60 से0मी0 की दूरी बरकरार रखें।
बुआई के समय खेत में उपयुक्त नमी बनाए रखें व अन्धी गुड़ाई करें।
नत्रजन के प्रयोग में विलम्ब नहीं करें। इसकी आधी मात्रा बुआई के समय व शेष आधी मात्रा जमाव होने पर सिंचाई के 2-3 दिन बाद दें।
सही समय पर खेत की हल्की व बार-बार 10-15 दिनों के अन्तराल पर सिंचाई करते रहें।

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