कृषि पिटारा

महिला स्वयं सहायता समूहों को केंद्र सरकार ड्रोन मुहैया कराएगी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृषि कार्यों के दौरान किसानों के समय और खर्च बचाने के लिए तकनीक के प्रयोग पर जोर देने का निर्णय किया है। इसके तहत इस क्षेत्र में एग्री टूल्स और मशीनरी के साथ-साथ एग्रीकल्चर ड्रोन का भी उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत, निजी कंपनियों से मिलकर इफको जैसी संस्थाएं ड्रोन विकसित करने के लिए सहमति प्रदान की है। इसके बाद अब महिला स्वयं सहायता समूहों को भी ड्रोन का इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वपूर्ण निर्णय को लागू करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान करने की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अनुसार, केंद्र सरकार अगले 4 वर्षों में देशभर के 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान करेगी, जिसका अनुमानित खर्च 1,261 करोड़ रुपये है।

ये ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को 2023-24 और 2025-2026 के दौरान उपलब्ध कराए जाएंगे और उन्हें कृषि गतिविधियों में सहायक होने के लिए उपयोग किया जाएगा। ड्रोन सेवाओं का शुल्क किसानों से लिया जाएगा और उन महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को 10 दिनों की ट्रेनिंग भी प्रदान की जाएगी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार ड्रोन की लागत का 80 प्रतिशत और सहायक उपकरणों के लिए अधिकतम 8 लाख रुपये देगी। इसके लिए युद्धस्तर पर काम शुरू हो गया है। इसके अलावा, इफको जैसी संस्थाएं भी भारतीय किसानों को ड्रोन पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं और पहली खेप के तहत इफको ने 400 ड्रोन ऑर्डर किए हैं।

इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ खेती में तकनीक का उपयोग करने की क्षमता प्रदान करना है। ड्रोन का उपयोग करके खेती के क्षेत्र में छिड़काव के लागत में 50 फीसदी की कमी होगी, जिससे किसानों को सीधे तौर पर लाभ होगा। इसके साथ ही समय और श्रम की बचत होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

इस पहल के तहत, लगभग 10 करोड़ महिलाएं, जो स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं, ड्रोन का उपयोग करके अपनी खेती में नवीनतम तकनीकी योजनाओं का उपयोग करेंगी, जिससे वे अधिक उत्पाद क्षमता के साथ सुरक्षित खेती कर सकेंगी। इस पहल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे, जो आर्थिक स्वायत्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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