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हम ज़हर बो रहे हैं, ज़हर काट रहे है, ज़हर खा रहे हैं और अस्पताल जा रहे हैं।

एक समय था जब उर्वरकों और रसायनिक खादों के ज़रिये उत्पादन को बढ़ाने की होड़ लग रही थी। किन्तु, आज अतीत की उस होड़ के नकारात्मक परिणाम कई रूपों में हमारे सामने आ रहे हैं। बात चाहे मनुष्यों या अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य की हो या फिर उस ज़मीन की सेहत की जो हमारा पेट भरने के लिए अन्नपूर्णा के नाम से जानी जाती है – सभी प्रदूषण के शिकार हैं।

इस मुद्दे की गंभीरता की ओर 25 जून को राज्य सभा सांसद आर. के. सिन्हा (बीजेपी, बिहार) ने सदन में आवाज़ उठाई। उन्हें कई एक स्वरों में इस मुद्दे पर समर्थन भी प्राप्त हुआ। चर्चा के दौरान उन्होंने उस कारण का भी ज़िक्र किया जिस वजह से आज तक इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया। श्री सिन्हा ने सरकार से जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि, ”हम ज़हर बो रहे हैं, ज़हर काट रहे है, ज़हर खा रहे हैं और अस्पताल जा रहे हैं।” सुनिए, उनका पूरा वक्तव्य।

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