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इन मिट्टियों में रागी की खेती देती है अधिक पैदावार

नई दिल्ली: रागी को फिंगर बाजरा, अफ्रीकन रागी और लाल बाजरा आदि नामों से भी जाना जाता है। यह सबसे पुरानी खाने वाली और पहली अनाज की फसल है, जो घरेलू स्तर पर प्रयोग की जाती रही है। माना जाता है कि यह फसल भारत में लगभग 4000 साल पहले लायी गई थी। इसको शुष्क मौसम में उगाया जा सकता है। यह फसल गंभीर सूखे को भी सहन कर सकती है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है। यह एक काफी कम समय में तैयार हो जाने वाली फसल है। इसकी कटाई मात्र 65 दिनों में की जा सकती है। इसको बड़ी आसानी के पूरे साल उगाया जा सकता है। बाकी अनाज और बाजरे वाली फसलों के मुकाबले इसमें प्रोटीन और खनिजों की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए आजकल इसकी मांग में काफी उछाल देखने को मिल रहा है।

रागी को विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है। जैसे – बढ़िया दोमट मिट्टी, जैविक तत्वों वाली मिट्टी, कम उपजाऊ पहाड़ी मिट्टी और बढ़िया जल निकास वाली काली मिट्टी इत्यादि। रागी की खेती के लिए मिट्टी का pH 4.5 से 8 होने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं। वीएल मँड़ुआ 101, वीएल मँड़ुआ 204, वीएल मँड़ुआ 124, वीएल मँड़ुआ 149 , वीएल मँड़ुआ 146, वीएल मँड़ुआ 315, वीएल मँड़ुआ 324, केएम-65, अक्षय और पीईएस 176 इत्यादि रागी की कुछ उन्नत किस्में हैं। इनसे आपको अच्छी पैदावार प्राप्त हो सकती है।

रागी की बिजाई ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में व बढ़िया जल निकास वाली मिट्टी में पनीरी लगा कर की जा सकती है। इस फसल के जरूरत से ज्यादा या कम घने पौधे लगाने से पैदावार कम हो जाती है। इसलिए उचित घनत्व के लिए दो पंक्तियों के बीच 25×15 से.मी. का फासला रखना चाहिए। जबकि बीज की गहराई 3-4 से.मी. तक होनी चाहिए। इस फसल की बिजाई हाथों से, छींटे द्वारा, पंक्तिओं में, मशीन से और पनीरी लगाकर की जा सकती है। जहाँ तक बीज की मात्रा का सवाल है तो मुख्य खेत के लिए 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज का इस्तेमाल करें। इससे आपको बढ़िया उपज प्राप्त होगी।

किसान मित्रों, रागी की बिजाई के शुरुआती समय में बढ़िया पैदावार की प्राप्ति के लिए नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है। इसलिए इसकी पर्याप्त व्यवस्था करें। चूँकि यह एक वर्षा ऋतु वाली फसल है, इसलिए इसको सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। लेकिन जुताई और फूल निकलने के समय अगर लम्बे समय तक बारिश ना हो तो पौधों के बढ़िया विकास के लिए के लिए ज़रूरत के अनुसार सिंचाई जरूर करें।

किसान मित्रों, आमतौर पर रागी की फसल 120 से 135 दिनों में तैयार हो जाती है। लेकिन यह समय काफी हद तक इसकी किस्मों पर निर्भर करता है। जब फसल तैयार हो जाए तो इसकी बालियों को दँराती के काटना चाहिए। फसल की कटाई के बाद बालियों को इकट्ठा कर धूप में लगभग 3-4 दिनों तक सुखाएं। अच्छी तरह सुखाने के बाद थ्रेशर की सहायता से अनाज को अलग कर लें। फिर उनका उचित तरीके से भंडारण करें।

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