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इन राज्यों के किसान अरबी की खेती से कमा सकते हैं बढ़िया मुनाफा

नई दिल्ली: अरबी एक ऐसी फसल है जो उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में उगाई जाती है। इसका पौधा 1 से 2 मीटर तक लंबा होता है। इसके पत्तों का रंग हल्का हरा होता है। इस फसल के बढ़िया विकास के लिए गर्मी के मौसम की आवश्यकता होती है। भारत में अरबी की खेती करने वाले प्रमुख राज्य हैं – पंजाब, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, आसाम, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना इत्यादि।


अरबी की खेती रेतली व दोमट मिट्टी में की जाती है। लेकिन जैविक तत्वों की भरपूर रेतली दोमट मिट्टी में अरबी की खेती बढ़िया परिणाम देती है। कम ऊपजाऊ और नमी वाली मिट्टी इसकी पैदावार को कम कर देती है। इसलिए ऐसी मिट्टी में अरबी की खेती करने से परहेज करना चाहिए।


श्री पल्लवी, श्री किरण, श्री रश्मि, सतामुखी और पंचमुखी अरबी की कुछ बेहतर किस्में हैं। किसान मित्रों, अरबी की खेती के लिए ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें। खेत को भुरभुरा करने के लिए बिजाई से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करें और उसके बाद सुहागा फेरें। खेत को जहाँ तक हो सके नदीनमुक्त रखें।

अरबी की उचित पैदावार के लिए फरवरी महीने के पहले सप्ताह में इसकी गांठों को नर्सरी बैडों पर ज़रूर बो दें। सही समय पर अरबी की बुआई आपको बढ़िया पैदावार लेने में मदद करेगी। प्रति एकड़ खेत में 300-400 किलोग्राम गांठों का प्रयोग करें। अरबी की गांठों की बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति के बीच 60×15 या 45 x 20 से.मी. का फासला बनाए रखें।

अरबी की बिजाई हाथों से की जाती है। बीजों को मिट्टी में 6 से 7.5 सैं.मी. की गहराई से बोया जाता है। इसकी बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई ज़रूर करें। गर्मी के मौसम में फसल की सिंचाई 3-4 दिनों के अंतराल पर करें। बारिश के मौसम में इस फसल को सामान्यतः सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। किसान मित्रों, अरबी की पुटाई इसके पत्तों के पीले पड़ने पर बिजाई के लगभग 175-200 दिनों में की जा सकती हैं। पुटाई के बाद अरबी को साफ किया जाता है और फिर छंटाई की जाती है। छंटाई के बाद आप फसल की उचित समय पर बिक्री कर सकते हैं या फिर अपने उपयोग में ला सकते हैं।

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