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इस रोग को कहा जाता है गन्ने का कैंसर, जानिए कैसे करें इसपर नियंत्रण

नई दिल्ली: गन्ना एक ऐसी फसल है जो वर्ष भर या उससे भी अधिक समय तक खेत में खड़ी रहती है। इस दौरान फसल जमाव, ब्यात तथा विस्तार आदि अवस्थाओं से गुजरकर परिपक्वता की स्थिति में पहुँचती है। इन अवस्थाओं से गुजरते समय यह फसल अनेक प्रकार की ब्याधियों से प्रभावित होती है। सामान्यत: गन्ने की फसल में विभिन्न रोगों के कारण उपज में लगभग 18 से 31 प्रतिशत तक की हानि होती है। यहाँ तक कि कभी-कभी विभिन्न रोगों के कारण सम्पूर्ण फसल भी नष्ट हो जाती है।

गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाला एक प्रमुख रोग है – लाल सड़न या रेड रॉट। लाल सड़न रोग गन्ने का सबसे भयंकर रोग है। इसे गन्ने का कैंसर भी कहते हैं। यह रोग कोलेटोट्राइकम फलकेटम नामक फफूंद द्वारा होता है। इस रोग के लक्षण जुलाई–अगस्त महीने से दिखाई देना प्रारम्भ होते हैं तथा फसल के अन्त तक दिखाई देते हैं। इससे ग्रसित गन्ने की अगोले की तीसरी से चौथी पत्तियाँ एक किनारे अथवा दोनों किनारों से सूखने लगती हैं। फिर धीरे–धीरे पूरा अगोला सूख जाता है। गन्ने को लम्बवत् फाड़ने पर इसके तने का गूदा लाल रंग का दिखाई देता है, जिसमें सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं। इसके कारण गन्ने के फटे हुए भाग से सिरके जैसी गन्ध आती है और गन्ना आसानी से टूट जाता है। कभी–कभी गन्ने की पत्ती की मध्य शिरा पर लाल रंग के धब्बे भी पाए जाते हैं। बाद में ये धब्बे पूरी मध्यशिरा को घेर लेते हैं।

गन्ने की फसल को लाल सड़न रोग से बचाने के लिए आप को.0118, को.8272 और को.98014 इत्यादि प्रजातियों की बुआई कर सकते हैं। उचित फसल चक्र अपना कर व हरी खाद का प्रयोग कर भी लाल सड़न रोग की संभावना को कम किया जा सकता है। लाल सड़न रोग से बचाव के लिए आप जैविक उपचार के तौर पर ‘ट्राइक्रोडर्मा’ व ‘एस्परजिलस’ आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालाँकि इस रोग पर अभी तक जैविक विधियों से पूर्ण नियंत्रण तो नहीं किया जा सका है लेकिन इस संबंध में कुछ उत्साहवर्धक परिणाम ज़रूर देखने को मिले हैं।

गन्ना बोने के पहले खेत में 2-3 साल तक धान की फसल बोने से भी लाल सड़न बीमारी के प्रकोप में कमी आती है। खेत में जल भराव इस रोग को बढ़ावा देता है, इसलिए गन्ने के खेत में पानी न भरे – इसका विशेष रूप ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि तमाम सावधानियों के बाद भी लाल सड़न रोग का प्रभाव बढ़ने लगे तो प्रभावित पौधों को निकालकर नष्ट कर दें और उस स्थान पर 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिट्टी से ढँक दें। लाल सड़न रोग के रासायनिक उपचार के तौर पर आप कार्बान्डिजिम का इस्तेमाल कर सकते हैं। गन्ने के बीज को कार्बान्डिजिम से उपचारित कर बोने से काफी हद तक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

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