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ये हैं जैतून की अधिक पैदावार देने वाली किस्में, इनकी खेती से आपको होगा अधिक मुनाफा

नई दिल्ली: जैतून की खेती कई अन्य फसलों के मुकाबले काफी अच्छा मुनाफा देती है। यह किसानों की आमदनी को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकती है। क्योंकि यह एक ऐसी फसल है जिसके विभिन्न हिस्सों की बिक्री की जाती है। मसलन – इसकी पत्तियां ऑलिव टी बनाने के काम आती हैं, जबकि इसके फल से तेल निकाला जाता है। इसके तेल की कीमत सरसों, सूरजमुखी या मूँगफली के तेल से कई गुना अधिक है। जैतून की बाज़ार में लगभग पूरे साल मांग बनी रहती है। इसकी बिक्री में अमूमन किसी तरह की समस्या नहीं आती है।

जैतून की खेती के लिए 6.5 से 8 क्षारीय और अम्लीय पीएच मान वाली मिट्टी उपयुक्त होती है। इसके पौधों के अच्छे विकास के लिए गहरी व उपजाऊ मिट्टी बेहतर होती है। जबकि इसका पौधा सख्त मिट्टी में ठीक से विकास नहीं कर पाता है। इसलिए ऐसी मिट्टी में जैतून की खेती ना ही करें तो बेहतर होगा। जैतून के पौधों में अधिकतम 48 से लेकर 50 डिग्री तथा न्यूनतम माइनस 7 डिग्री तक तापमान सहने की क्षमता होती है। भारत में सबसे अधिक राजस्थान में जैतून की खेती की जाती है।

जैतून की बुआई के लिए खेत की तैयारी करते समय सबसे पहले 3 गुणा 3 गुणा 3 फीट का गड्ढा खोद लें और उसमें 40-50 किलोग्राम गोबर की खाद और दीमकरोधी दवा डाल दें। इसके बाद गड्ढों को 3 से 4 चार दिनों के लिए छोड़ दें। इसके बाद सवा फीट का एक गड्ढा खोदकर उसमें जैतून का पौधा लगा दें। गड्ढा खोदने के तुरंत बाद उसमें दो लीटर पानी डाल दें और बाद में उसे ड्रिप इरिगेशन से जोड़ दें ताकि पौधे को लगातार पानी मिलता रहे। जब पौधों की सीधी बढ़वार होने लगे तो उनकी शाखाएं काट दें और उसे कटोरानुमा बढ़वार लेने दें। बुआई के दौरान दो पौधों के बीच 4 मीटर और दो कतारों के बीच 7 मीटर की दूरी बनाए रखें। एस्कोलानो, फ्रटियो, कोराटीना, लैक्सिनो, एस्कोटिराना और पैंडोलीनो जैतून की कुछ उन्नत किस्में हैं। इनसे आपको अच्छी उपज मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जैतून की फसल काफी जल्दी उपज देने लगती है। लगभग दो साल के बाद जैतून के पौधों की बढ़वार इतनी होने लगती है कि आप उसकी पत्तियों की बिक्री कर सकेंगे। इसके लिए आप समय-समय पत्तियों की कटाई करते रहें। फिलहाल जैतून की पत्तियां कम से कम 50 से 60 रुपए प्रति किलो के भाव में आसानी से बिक रही हैं। जैतून के पौधे में चार से पांच साल के बाद फल लगने शुरू हो जाते हैं, जिसे कई कंपनियां सीधे किसानों से खरीद लेती हैं। लेकिन कृषि विशेषज्ञ जैतून की खेती शुरू करने वाले किसानों को शुरू-शुरू में उचित सलाह के साथ खेती शुरू करने का सुझाव देते हैं। आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र पहुँचकर सरकार की ओर से इसपर मिलने वाली सब्सिडी के बारे भी पता कर सकते हैं। इससे जैतून की खेती में आने वाली आपकी लागत काफी कम हो जाएगी।

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