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जीरे की खेती के दौरान सिंचाई में बरतें विशेष सावधानी

नई दिल्ली: जीरा की खेती के लिए दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। अगर आप भी इसकी खेती में हाथ आजमाना चाहते हैं तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर अपने क्षेत्र में इस फसल की अनुकूलता के बारे में जानकारी अवश्य लें। अगर आपके क्षेत्र की मिट्टी व जलवायु इस फसल की खेती के लिए अनुकूल है तो सर्दी के मौसम में आप इसकी खेती शुरू कर सकते हैं। अधिक तापमान जीरा की खेती के लिए हानिकारक होता है। जीरा की बुआई के समय तापमान 24 से 28 डिग्री सेंटीग्रेट तथा पौधों की वृद्धि के समय 20 से 22 डिग्री सेंटीग्रेट होना चाहिए। बेहतर होगा कि आप इसकी बुआई नवम्बर के तीसरे सप्ताह से लेकर दिसम्बर के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें।

खेत की तैयारी करते समय पहली जुताई देसी हल से करें। इसके बाद रोटावेटर चलाएँ, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद खेत में पाटा चलाकर भूमि को समतल कर लें। फिर 5 से 8 फीट की क्यारियाँ बना दें। इससे सिंचाई तथा खरपतवार की सफाई में आपको सुविधा होगी। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए आप खेत में प्रति हेक्टेयर 8 से 10 टन गोबर की खाद का उपयोग करें। यह खाद अंतिम जुताई से पहले खेत में मिला दें। इसके साथ ही 65 किलोग्राम डीएपी तथा 9 किलोग्राम यूरिया भी प्रति एकड़ के हिसाब से दें।

जीरे की बुआई के समय 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज का इस्तेमाल करें। बीजों की बुआई के दौरान उन्हें एक से डेढ़ सेंटीमीटर की गहराई में बोएँ। क्योंकि बीजों को इससे ज्यादा गहराई पर बोने से उनका अंकुरण कम होगा। इसलिए बीजों के लिए निर्धारित गहराई को बरकरार रखें। गुजराती जीरा, R.Z. – 19, 209, 223 और J.C. – 1,2,3, जीरे की कुछ उन्नत किस्में हैं।

फसल की पहली सिंचाई बुआई के तुरंत बाद करें। याद रहे, यह सिंचाई हल्की होनी चाहिए तथा पानी की धार तेज न हो। तेज धार में फसल की सिंचाई करने से जीरा पानी में बहकर एक जगह पर आ जाता है। फसल की दूसरी सिंचाई बुआई के 7 दिनों के बाद करें। इसके बाद 20 – 20 दिनों के अंतराल पर 4 से 5 सिंचाई आवश्य करें। सिंचाई के दौरान जीरे के फूलों को हरसंभव बचाने की कोशिश करें। जीरा की खेती लगभग 120 से 125 दिनों की होती है। प्रति एकड़ में इसका उत्पादन 6 से 7 क्विंटल तक होता है, जिसका बाज़ार मूल्य सामान्य रूप से लगभग 80 से 90 हजार रूपये तक होता है।


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