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मिट्टी की सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है वर्मी कम्पोस्ट, इस विधि से आप खुद भी कर सकते हैं इसका निर्माण

नई दिल्ली: वर्मी कम्पोस्ट जैविक कृषि का एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है। इसके उपयोग से रासायनिक खाद पर आपकी निर्भरता बहुत कम हो जाती है। इससे खेती पर आने वाली भारी-भरकम लागत से भी आपको छुटकारा मिलता है।

केंचुआ एक ऐसा जीव है जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। लोग जब परंपरागत कृषि करते थे तब केंचुए प्राय: भूमि में हमेशा पाये जाते थे। विशेष रूप से वर्षाकाल में इनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलती थी। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे लोगों ने रासायनिक कृषि को अपनाना शुरू किया वैसे-वैसे भूमि में केंचुओं की मौजूदगी कम होने लगी। खादों तथा कीटनाशकों के लगातर प्रयोग ने केंचुओं के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया। केंचुओं की कमी के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी अब काफी कम हो गई है।

केंचुआ मिट्टी में पाये जाने वाले जीवों में सबसे प्रमुख है। ये मिट्टी तथा कच्चे जीवांश को अपने भोजन के रूप में निगलकर अपनी पाचन नलिका से गुजारते हैं, जिससे वह महीन कम्पोस्ट में परिवर्तित हो जाते हैं। फिर जब अभीष्ट पदार्थ के रूप में इन्हें अपने शरीर से बाहर निकालते है तो इसी कम्पोस्ट को केंचुआ खाद या वर्मी कम्पोस्ट कहा जाता है। इस विधि द्वारा कम्पोस्ट मात्र 45 से 75 दिनों में तैयार हो जाता है। यह खाद मिट्टी की सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

अगर आप वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करना चाहते हैं तो सबसे पहले ऐसी जमीन का चुनाव करें जो ऊंची हो, ताकि वहाँ पानी का जमाव नहीं हो। इसके बाद तीन फ़ीट लंबाई और चौड़ाई के अनुसार दो-दो ईंटों से एक घेरा बनाएँ। फिर इस घेरे में मोटी पॉलीथिन बिछा दें। इसे धूप और पानी से बचाने के लिए छत की व्यवस्था भी करें। इसके बाद प्लास्टिक के ऊपर केले के तने के छोटे-छोटे टुकड़े कर दो से ढाई इंच की परत बना लें।

इसके बाद 15 से 20 दिन पुराने गोबर को 60 अनुपात 40 में मिला लें। गोबर के साथ आप फसल अवशेष या घरेलु कचरे को डाल सकते हैं। फिर इस मिश्रण में जरूरत के हिसाब से पानी मिला लें। अब इस मिश्रण को केले के टुकड़े के ऊपर ऐसे डालें कि ऊपर से ऊंचा और चारों तरफ ढलान हो। फिर इस ढेर के ऊपर 15 सौ से 1800 केंचुओं को प्रति घन मीटर के हिसाब से डाल दें। इसके बाद जूट की बोरी को अच्छे से भिगोकर मिश्रण को ढंक दें। इसके बाद समय-समय पर इसे उलटते-पलटते रहे, ताकि नीचे की परत ऊपर और ऊपर की परत नीचे आ जाए। किसान मित्रों, इस तरह 45 से 75 दिनों के बाद आपका वर्मीकम्पोस्ट तैयार हो जाएगा।

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