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मिट्टी उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए ऐसे करें तरल जीवामृत का उपयोग

नई दिल्ली: तरल जीवामृत एक बहुत ही प्रभावशाली जैविक खाद है, जिसे गोबर के साथ पानी व कई अन्य पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बहुत बढ़ जाती है। यह फसल की वृद्धि और विकास के साथ-साथ मिट्टी की संरचना सुधारने में काफी मदद करता है। साथ ही यह पौधों की विभिन्न रोगाणुओं से सुरक्षा करता है। यह पौधों की प्रतिरक्षा क्षमता को भी बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं तथा फसल से बहुत अच्छी पैदावार मिलती है।

तरल जीवामृत को आप कई प्रकार से अपने खेतों में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है फसल में पानी के साथ जीवामृत देना। जिस खेत में आप सिंचाई कर रहे हैं उस खेत के लिए पानी ले जाने वाली नाली के ऊपर ड्रम को रखकर वाल्व की सहायता से तरल जीवामृत पानी में डालें। इसकी धार इतनी रखें कि खेत में पानी लगने के साथ ही ड्रम खाली हो जाए। इससे जीवामृत पानी में घुलकर अपने आप फसलों की जड़ों तक पहुँचेगा।

तरल जीवामृत को आप इसी विधि से 21 दिनों के अंतराल पर फसलों को दे सकते हैं। इसके अलावा खेत की जुताई के समय भी आप जीवामृत को मिट्टी पर छिड़क सकते हैं। साथ ही तरल जीवामृत का फसलों पर भी छिड़का जा सकता है। अगर आप फलदार पौधों पर तरल जीवामृत का छिड़काव करना चाहते हैं तो इसके लिए दोपहर के समय का चुनाव करें। जब पौधों की छाया बनती है तब छाया के एक से डेढ़ फुट की परिधि के चारों तरफ नाली बनाकर प्रति पेड़ ढाई से पाँच लीटर तरल जीवामृत महीने में दो बार पानी के साथ दें। जीवामृत छिड़कते समय भूमि में नमी बरकरार रखने की व्यवस्था ज़रूर करें।

आप जीवामृत का प्रयोग विभिन्न फसलों फार कर सकते हैं। जैसे – गेहूँ, मक्का, बाजरा, धान, मूंग, कपास, सरसों,मिर्च, टमाटर, बैंगन व प्याज इत्यादि। तरल जीवामृत का प्रयोग सभी प्रकार के फलदार पेड़ों पर भी किया जा सकता है। इसका कोई भी नुकसान नहीं है।

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