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मूंग की व्यावसायिक खेती कर आप भी कमा सकते हैं बढ़िया मुनाफा, इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली: मूंग की खेती किसानों के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। एक ओर जहाँ इससे अच्छी आमदनी होती है वहीं दूसरी ओर इससे मिट्टी की ताकत में भी इजाफा होता है। मूंग को खरीफ, रबी व जायद तीनों मौसमों में आसानी से उगाया जा सकता है। उत्तर भारत में इसे बारिश व गर्मी के मौसम में उगाया जाता है। इस फसल के लिए ज्यादा बारिश नुकसानदायक होती है। ऐसे इलाके, जहां पर 60 से 75 सेंटीमीटर तक सालाना बारिश होती है, मूंग की खेती के लिए अच्छी होती हैं। मूंग की फसल के लिए गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है। पौधों पर फलियां लगते समय और फलियां पकते समय सूखा मौसम व ऊंचा तापमान इस फसल के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है।

जायद मूंग की बुआई जहां सिंचाई की सुविधा हो वहां फरवरी में ही कर देनी चाहिए। खरीफ मौसम में मूंग की बुआई मानसून आने पर जून के दूसरे पखवाड़े से जुलाई के पहले पखवाड़े के बीच करनी चाहिए। किसान मित्रों, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार व पश्चिम बंगाल में मूंग की खेती गर्मी के मौसम में की जाती है। इन राज्यों में मूंग की खेती गन्ना गेहूं, आलू आदि की कटाई के बाद शुरू हो जाती हैं।

मूंग की बढ़िया खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट जमीन उपयुक्त होती है। उत्तरी भारत में अच्छी जल निकासी वाली दोमट मटियार मिट्टी मूंग की खेती के लिए अच्छी होती है। किसान मित्रों, यदि आप मूंग की खेती करने जा रहे हैं तो बारिश शुरू होने के बाद मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की 1 जुताई करें। इसके बाद 2 से 3 बार कल्टीवेटर या देसी हल से जुताई करें और पाटा चला कर खेत को बराबर कर लें। खेत से खरपतवार व पुरानी फसल के ठूठों को बाहर निकाल दें। इसके अलावा आखिरी जुताई के समय खेत में गोबर या कंपोस्ट खाद 50 क्विंटल प्रति हेक्टयर की दर से मिट्टी में ज़रूर मिलाएँ।

किसान मित्रों, रबी मौसम के लिए आप टाइप 1, पंत मूंग 3, एचयूएम 16, सुनैना और जवाहर मूंग 70 आदि क़िस्मों में से किसी एक किस्म का चुनाव कर अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप खरीफ मौसम में मूंग की खेती करने जा रहे हैं तो पूसा विशाल, मालवीय ज्योति, एमएल 5, जवाहर मूंग 45, अमृत, पीडीएम 11 और टाइप 51 इत्यादि किस्मों से आप अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। खरीफ मौसम में मूंग की खेती के लिए 12 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से बीज का इस्तेमाल करें। मूंग की बुआई कतारों में 30 से 40 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। रबी व गर्मी के मौसम में बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टयर रखें और बुआई कतारों में 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर करें।

मूंग एक दाल वाली फसल है, इसलिए इसमें ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं पड़ती है, फिर भी 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस व 20 किलोग्राम पोटाश की मात्रा प्रति हेक्टयर की दर से बुआई के समय देना फायदेमंद होगा। गंधक की कमी वाले रकबों में गंधकयुक्त उर्वरक 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दें।

खरीफ के मौसम में मूंग की फसल को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन फूल आने की स्थिति में सिंचाई करने से उपज में काफी इजाफा होता है। अधिक बारिश की दशा में खेत से पानी निकालना बेहद जरूरी होता है। पानी न निकालने से मूंग की फसल पद्गलन रोग से प्रभावित हो जाती है, जिससे फसल को भारी नुकसान होता है। गर्मी के मौसम में मूंग की फसल को खरीफ की तुलना में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए इस समय 10 से 15 दिनों के अंतर पर खेत फसल की 4 से 6 सिंचाई करनी चाहिए। ज्यादा गर्मी होने पर सिंचाई का अंतर 8 से 10 दिनों का रखें।

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