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मोती की खेती करने वाले वो किसान जिनकी तारीफ प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में की

बेगूसराय: रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम मुद्दों के साथ एक किसान का भी ज़िक्र किया। तबसे कृषि क्षेत्र से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कई लोग उस किसान के बारे में बात कर रहे हैं। ये किसान हैं – बिहार के बेगूसराय जिले के जय शंकर कुमार। अब इनके द्वारा की जाने वाली सीप पालन या मोतियों की खेती की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। जय शंकर कुमार वैसे किसानों के लिए एक नजीर बन चुके हैं, जो एक लंबे समय से उस मॉडल पर खेती कर रहे हैं, जिससे एक परिवार का गुजारा भी बड़ी मुश्किल से चल पाता है, अधिशेष और मुनाफे की बात तो भूल ही जाइये।

जय शंकर कुमार पहले एक सामान्य सी नौकरी करते थे। नौकरी थी – वंशीधर उच्च विद्यालय तेतरी (बेगूसराय) में क्लर्की की। फिर एक दिन काफी समय से बन रहे विचारों ने जोर पकड़ा और उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने तय किया कि वो अब मोती की खेती करेंगे। इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले सबसे ज़रूरी था – इसके बारे में पूरी जानकारी लेना। उन्होंने वो तमाम जानकारियाँ हासिल की, जो इस शुरुआत के लिए कम या ज़्यादा अहम थीं। फिर उन्होंने जयपुर व भुवनेश्वर में सीप या मोती पालन का प्रशिक्षण लिया। इन सबके बाद अब बारी थी अपने ज्ञान और प्रशिक्षण के साथ धरातल पर उतरने की, तो उन्होंने अपने गाँव में ही मोतियों की खेती की शुरूआत की। इसमें वह सफल रहे और आज अन्य किसानों के लिए नजीर बन गये हैं। आज आलम ये है कि न केवल जय शंकर कुमार आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि अन्य राज्यों से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और पटना लौटे प्रवासी मजदूरों को भी इसके लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। संभव है कि किसान जय शंकर के प्रयासों से प्रेरित होकर कई और किसान भी अपनी किस्मत बदल दें।

मोती की खेती पानी के अंदर की जाती है। इसकी खेती के लिए किसान जयशंकर ने स्वयं एक छोटे से तालाब का निर्माण किया, जिसमें सीप पालन के जरिए हजारों की संख्या में मोती तैयार किए जा रहे हैं। आज जयशंकर के पास तालाब से निकाले गए कई दुर्लभ मोती हैं। जय शंकर कुमार ने अपने पहले प्रयास में ही मीठे जल वाले तालाब में काफी कम लागत पर सीप से मोती तैयार कर लिए। सीप पालन के बारे में वो बताते हैं कि, “जिंदा सीप के शरीर को ऑपरेट कर जिस आकृति का मोती तैयार करना है उस आकृति का कैल्सियम कार्बोनेट का टुकड़ा जिंदा सीप के शरीर में डाल दिया जाता है। इस टुकड़े के कारण सीप के शरीर को कष्ट पहुँचता है, जिसके दर्द से सीप शरीर के अंदर से कैल्सियम केमिकल का श्राव करता है। वह श्राव उक्त टुकड़े पर जमने लगता है। तालाब में छह महीने तक यह टुकड़ा जिंदा सीप के शरीर में पड़ा रहता है। उसके बाद मनचाही आकृति का मोती तैयार हो जाता है।”

अब, जब किसान जय शंकर कुमार की कहानी प्रधानमंत्री के जरिये कई और लोगों तक पहुँची है तो ऐसे में कई किसान सीप पालन या मोती की खेती के बारे में जानना चाहते हैं। मसलन – इसे शुरू करने की विधि, लागत और मुनाफा वगैरह। तो आपको बता दें कि, एक सीप से मोती तैयार करने में लगभग लागत चार सौ से पाँच सौ रुपए की लागत आती है। जबकि, बाजार में इसकी कीमत चार से पाँच हजार रुपये तक है। यानी लागत से ठीक दस गुना अधिक मुनाफा।

उल्लेखनीय है कि मोती की खेती के अलावा प्रगतिशील किसान जयशंकर कुमार पशुपालन, बकरी पालन, बतख पालन, खरगोश पालन, मत्स्य पालन व औषधीय पौधों की खेती में भी विशेष रुचि रखते हैं। वो वर्मी कम्पोस्ट के जरिये जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इससे किसानों की न केवल कृषिगत लागत कम हो रही है, बल्कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचते हुए किसान पौष्टिक उपज प्राप्त कर रहे हैं। जय शंकर कुमार के इन तमाम प्रयासों को पहले जिला स्तर, राज्य स्तर और अब स्वयं देश के प्रधानमंत्री के द्वारा सराहा गया है।

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