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बिहार सरकार पोल्ट्री फार्म के व्यवसाय को कर रही है प्रोत्साहित

पटना: किसानों के लिए मुर्गी पालन का व्यवसाय इन दिनों काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। इस व्यवसाय के प्रति किसानों के बढ़ते रुझान को देखते हुए बिहार सरकार ने कई योजनाएँ शुरू कर रखी हैं। इन्हीं में से एक है – बिहार पोल्ट्री फार्म योजना। मांस और अंडे में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार की ओर से अनुदान की व्यवस्था की गई है। साथ ही बैंक से आसान किस्तों पर ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है। किसानों तक आसानी से अनुदान पहुँच सके इसके लिए फरवरी महीने में एक पोर्टल की शुरुआत की गई है। काफी किसान इसका लाभ उठा रहे हैं।

बॉयलर और लेयर मुर्गी पालन योजना के तहत् किसानों को प्रोत्साहन दिए जाने की वजह से बिहार में लगातार 5 साल से मुर्गी पालन में बढोत्तरी हुई है। अगर आप बिहार के निवासी हैं और मुर्गी पालन से जुड़ी योजनाओं का लाभ उठना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ आवश्यक कागजातों की आवश्यकता पड़ेगी। मसलन – फोटो, आधार कार्ड, वोटर आईडी, सरकारी संस्थानों से 5 दिवसीय मुर्गी पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, आवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, लगान रसीद, एलपीसी करारनामा, नजरी नक्शा और आवेदक का बैंक स्टेटमंट इत्यादि। इन कागजातों की व्यवस्था हो जाने के बाद आप बिहार सरकार की मुर्गी पालन से जुड़ी संबंधित वेबसाइट पर जाएं और आवेदन करें।

अगर आप मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो एसबीआई इसके लिए कुल खर्च का 75 प्रतिशत तक लोन दे रहा है। आप 5000 मुर्गियों के लिए 3 लाख रुपये से लेकर 9 लाख रुपए तक का कर्ज ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं। उदाहरण के तौर पर सामान्य जाति के किसानों के लिए अनुदान की सीमा 30 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जाति के किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। बैंक लोन के ब्याज पर भी किसानों के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

अगर लोन लेने वाला आवेदक सब्सिडी प्राप्त करना चाहता है तो उसे अपने क्षेत्रीय निर्देशक (पशु-पालन) के कार्यालय में संबंधित कागजातों को जमा करना होगा। क्षेत्रीय निर्देशक लोन देने वाली टीम के अध्यक्ष होते हैं। विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारी भी इस टीम में शामिल होते हैं। आवेदक के सभी कागजातों की जांच के लिए तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी होती है, जो आवेदक की अंतिम जांच करती है। जांच के दौरान सफल आवेदक के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा जाता है। यह कमेटी ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर योग्य लाभार्थियों का चयन करती है। गौरतलब है कि बिहार पोल्ट्री फार्म योजना के तहत् चयनित आवेदक द्वारा लेयरमुर्गी फार्म को सात साल तक चलाना आवश्यक है।

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