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पूसा कृषि विज्ञान मेले का समापन, रेडियो पिटारा के स्टॉल पर बड़ी संख्या में पहुँचे किसान

नयी दिल्ली: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर, पूसा में विगत 25 फरवरी से चल रहे तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेले का आज समापन हो गया। आत्मनिर्भर किसान की थीम पर आयोजित इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के द्वारा किया गया था। इस आयोजन को लेकर किसानों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कोरोना संकट के बावजूद मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए किसानों ने हिस्सा लिया। यहाँ वे कृषि कार्यों में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न उपकरणों को तलाशते हुए भी नजर आए। हर बार की तरह इसबार भी मेले में युवा किसानों की अच्छी-खासी उपस्थिति देखने को मिली।

मेले में इस बार किसानों को पूसा संस्थान द्वारा विकसित नई किस्मों की सजीव प्रदर्शनी देखने को मिली। इसमें दलहन, तिलहन के अलावा बागवानी से जुड़ी किस्में भी शामिल थीं। इसके अलावा यहाँ रबी फसलों, सब्जियों और फूलों की भी प्रदर्शनी लगाई गई थी। जो किसान विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में खरीदना चाहते थे, उनके लिए भी मेले में विशेष व्यवस्था की गई थी। मेले में पहली बार पूसा संस्थान द्वारा विकसित बासमती धान की उन्नत किस्म पूसा बासमती 1632 बिक्री के उपलब्ध कारवाई गई। इसे खरीदने के लिए कई किसान सुदूर क्षेत्रों से मेले में आए थे। पूसा कृषि विज्ञान मेले में किसानों के लिए मिट्टी व पानी के नमूनों की मुफ्त जांच के लिए स्टॉल लगाए गए थे। जो किसान कृषि से संबंधित किसी जिज्ञासा का समाधान चाहते थे उनसे कृषि वैज्ञानिकों ने प्रत्यक्षतः संवाद भी किया।

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2021 के समापन समारोह में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कृषि बिल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “नए कृषि कानूनों से शहरों की ओर पलायन रुकेगा। केंद्र सरकार खेती-किसानी को फायदे का सौदा बनाने की दिशा में काम कर रही है और इसमें नए कृषि कानून बहुत सहायता करेंगे। जब खेती से किसानों को फायदा होगा तो फिर लोग गांवों से शहरों की तरफ क्यों आना चाहेंगे? इस तरह शहरों की तरफ लोगों का पलायन रुकेगा।” उन्होने यह भी कहा कि, “साल 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करना केंद्र सरकार का पहला लक्ष्य है और सरकार इसी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।”

मेले में आए किसानों के बीच सामाजिक दूरी का पालन किया जा सके, साथ ही साफ-सफाई का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाए – इसके लिए समुचित व्यवस्था की गयी थी। कोरोना संकट के बावजूद पूसा कृषि विज्ञान मेले में देश के कोने-कोने से किसान पहुंचे थे। जो किसान किसी कारणवश मेले में नहीं पहुंच सके, उनमें से अधिकांश किसानों ने मेले को ऑनलाइन देखा।

गौरतलब है कि इसबार पूसा कृषि विज्ञान मेले में उन स्टार्टअप को भी आमंत्रित किया गया था, जो इस समय कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। मेले में शामिल होने से पहले इन्हें स्वयं पूसा कृषि इंक्यूबेटर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। रेडियो पिटारा भी उनमें से एक था। जो किसान मेले में कृषि से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाने के उद्देश्य से आए थे, वे रेडियो पिटारा के स्टॉल पर विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान व्यक्तिगत रूप से उनकी समस्याओं का समाधान सुझाया गया।

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