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रबी सीजन के दौरान प्याज की इन किस्मों से आप पा सकते हैं अधिक उत्पादन

नई दिल्ली: प्याज उत्पादन के मामले में भारत पूरे विश्व में दूसरे स्थान पर है। इसकी खेती अलग-अलग प्रकार की मिट्टियों जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है। यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी में, जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो, बढ़िया परिणाम देती है। जैविक तत्वों से भरपूर मिट्टी में प्याज की खेती अच्छी पैदावार की संभावना को काफी बढ़ा देती है। विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है। क्योंकि मिट्टी के खराब जमाव और कम उपजाऊपन के कारण इसमें प्याज का विकास ठीक से नहीं हो पाता है। प्याज की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए।

रबी सीजन में प्याज की बिजाई के लिए मध्य-अक्तूबर से लेकर मध्य-नवबंर तक नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिए। इससे नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। बेहतर होगा कि आप रोपाई के लिए 10-15 सेंटीमीटर कद के पौधों का चुनाव करें। अधिक पैदावार लेने के लिए रोपाई के समय पंक्तियों के बीच 15 सेंटीमीटर और पौधों के बीच का 7.5 सेंटीमीटर का फासला बरकरार रखें। नर्सरी में बीज 1-2 सेंटीमीटर की गहराई में बोएँ और बिजाई के लिए रोपाई विधि का प्रयोग करें।

किसान मित्रों, रबी सीजन के लिए आप प्याज की निम्न क़िस्मों का चुनाव कर सकते हैं:


भीमा किरण: यह रबी के मौसम में उगाने योग्य किस्म है। इसके प्याज़ हल्के लाल रंग के और गोलाकार होते हैं। यह किस्म 145 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। इस किस्म के प्याज़ों को ज्यादा समय तक भंडारण करके रखा जा सकता है। इसकी औसतन पैदावार 165 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

भीमा शक्ति: यह खरीफ और रबी दोनों मौसम में उगाने योग्य किस्म है। यह किस्म 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार लगभग 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

भीमा श्वेता: यह रबी के मौसम में उगाने योग्य किस्म है। इसके प्याज़ सफेद और गोल होते हैं। यह किस्म लगभग 110-115 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार लगभग 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

अर्लि ग्रेनो: यह किस्म आईएआरआई, नई दिल्ली द्वारा तैयार की गई है। इसके प्याज़ पीले रंग के होते हैं। यह खरीफ और रबी दोनों मौसम में उगाने योग्य किस्म है। इसकी औसतन पैदावार लगभग 200 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इन क़िस्मों की बुआई के बाद इनकी पुटाई भी एक काफी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। जब पौधों के ऊपरी हिस्से का पचास प्रतिशत भाग नीचे गिर जाए तो समझ लें कि फसल तैयार हो चुकी है। बेहतर होगा कि आप प्याज़ को हाथों से उखाड़ें। खेत से प्याज निकालने के बाद उन्हें 2-3 दिन तक खेत में ही छोड़ दें। इससे प्याज में मौजूद अनावश्यक नमी निकल जाएगी। जब प्याज के गांठ अच्छी तरह से सूख जाएँ तब गांठों को आकार के अनुसार छांटकर अलग कर लें। इसके बाद आप चाहें तो इन्हें अपने उपयोग के लिए सुरक्षित रख सकते हैं या फिर बिक्री के लिए मंडी ले जा सकते हैं।

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