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जानिए, सतावर की खेती क्यों है मुनाफे से भरी? इसकी खेती में किन बातों का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली: पारंपरिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को सामान्यतः औसत सा ही मुनाफा प्राप्त होता है। इन फसलों की खेती में यदि बहुत अधिक जोखिम नहीं है तो बहुत अधिक फायदा भी नहीं है। इसलिए आज के समय में प्रयोगधर्मी किसान अधिक मुनाफे के लिए विभिन्न फसलों की खेती में हाथ आजमा रहे हैं, विशेष रूप से व्यावसायिक महत्व वाली फसलों की खेती में। ऐसे किसानों के लिए औषधीय फसलों की खेती एक बेहतर विकल्प है। अगर आप भी औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं तो आप सतावर की खेती शुरू कर सकते हैं। सतावर एक औषधीय फसल है, जिसका प्रयोग कई प्रकार की औषधियों को बनाने के लिए होता है। हाल के वर्षों में इस पौधे की मांग में काफी उछाल आया है। इस वजह से इसकी खेती से किसानों को काफी अच्छी कीमत प्राप्त हो रही है। अगर आप सतावर की खेती करने जा रहे हैं तो कुछ बातों का ज़रूर ध्यान रखें। जैसे –

सतावर की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी का चुनाव करें।

सतावर की खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच ज़रूर करवाएँ। पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना आवश्यक है।

बेहतर पैदावार पाने के लिए सतावर की रोपाई जून से जुलाई के महीने में ज़रूर पूरी कर लें।

जहाँ तक बात है बीज की मात्रा की तो प्रति एकड़ में 400-600 ग्राम बीज का प्रयोग करें।

फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजों को गोमूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचारित करें। उपचार के बाद बीज नर्सरी बेड में बोएँ।

नर्सरी तैयार करते समय यह ध्यान रखें कि दो पंक्तियों के बीच 4.5 x 1.2 मीटर का फासला बना रहे। इसके अलावा गड्ढा खोदेते समय 20 सेमी की गहराई भी बरकरार रखें।

बीज बोने के 20 दिनों के बाद सतावर का अंकुरण प्रारम्भ होता है और 30 दिनों में पूरा हो जाता है। इस दौरान फसल पर निगरानी रखें।

सतावर की फसल तैयार होने में डेढ़ साल यानी लगभग 18 महीने का वक्त लग जाता है। दरअसल 18 महीने में इस पौधे की जड़ बन जाती है, जिसके बाद इसे अच्छे से सुखाना होता है। सतावर का प्रयोग कई प्रकार की दवाइयाँ बनाने में किया जाता है और दवा की क्वालिटी काफी हद तक जड़ पर निर्भर करती है। इसीलिए इसके साथ कोई समझौता नहीं करें। यहां एक और बात ध्यान रखने वाली है कि जड़ को सुखाने पर ये लगभग एक तिहाई रह जाती है। यानी अगर आप 10 क्विंटल सतावर उगाते हैं तो बेचते समय ये सिर्फ 3 क्विंटल ही रह जाती है।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो एक एकड़ में 20 से 30 क्विंटल तक सतावर की पैदावार हो जाती है। बाज़ार में एक क्विंटल सतावर की कीमत लगभग 50 से 60 हजार रुपए है। आपको बता दें कि एक एकड़ जमीन पर खेती कर आप 20-30 क्विंटल तक सतावर उगा सकते हैं। इतनी मात्रा में सतावर की बिक्री कर लगभग 7-8 लाख रूपए तक कमाया जा सकता हैं। जबकि इतनी सतावर उगाने के लिए बीज और बाकी खर्चों पर आपको 50-60 हजार से ज्यादा लागत नहीं आएगी। इसकी खेती करने वाले किसानों को राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से 30 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे सतावर की खेती पर आने वाली आपकी लागत में और कमी हो सकती है।

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