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सटीक परिणाम के लिए मृदा परीक्षण के दौरान ये सावधानियाँ ज़रूर बरतें

नई दिल्ली: बेहतर फसल उत्पादन व मृदा स्वास्थ्य के लिए संन्तुलित पौध पोषण बहुत ही आवश्यक है। और इसके लिए आपको खेत की मिट्टी में उपलब्ध विभिन्न पोषक तत्वों की उपस्थित मात्रा की जानकारी होनी चाहिए। इस जानकारी के लिए आपको मिट्टी परीक्षण का सहारा लेना होगा। मिट्टी परीक्षण द्वारा प्राप्त परिणामों से आपको कई प्रकार के लाभ होंगे। उदाहरण के तौर पर इससे आप उर्वरको का सन्तुलित मात्रा में उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। इससे आपकी कृषिगत लागत भी कम होगी। क्योंकि मिट्टी की वर्तमान अवस्था के आधार पर आपको विभिन्न कृषिगत क्रियाओं को सम्पन्न करने के उचित समय की आपको जानकारी होगी।

मिट्टी परीक्षण के लिये सबसे महत्वपूर्ण होता है कि मिट्टी का सही नमूना एकत्र करना। इसके लिये जरूरी है कि नमूना इस प्रकार लिया जाए कि वह जिस खेत या क्षेत्र से लिया गया हो, वह उसका पूर्ण प्रतिनिधित्व करता हो। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु मिट्टी के प्रतिनिधि नमूने इकट्ठे किये जाते हैं। किसान मित्रों, मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि नमूना लेने से पहले खेत से ली गई फसल की बढ़वार एक सी रही हो। उसमें एक समान उर्वरक उपयोग किये गये हों। इसके अलावा जमीन पूरी तरह से समतल हो।

इन स्थितियों में पूरे खेत से एक ही प्रतिनिधि नमूना लिया जा सकता है। इससे मृदा जाँच के परिणाम काफी सटीक आते हैं। इसके विपरीत यदि खेत से अलग-अलग फसल ली गई हो, भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग उर्वरक की मात्रा डाली गई हो, फसल बढ़वार कहीं कम या कहीं ज्यादा रही हो, जमीन समतल न होकर ढालू हो तो इन परिस्थितियो में खेत को समान गुणों वाली सम्भव इकाईयो में बांटकर हर इकाई से अलग-अलग प्रतिनिधि नमूना लेना चाहिये।

इसके अलावा एक और बात का आपको विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। वह यह कि मृदा जाँच के सटीक परिणाम पाने के लिए मिट्टी का नमूना सामान्यत: फसल बोने के एक महीने पहले लेकर परीक्षण के लिए भेजना चाहिये, ताकि समय पर परिणाम प्राप्त हो जाएँ। फिर सिफारिश के अनुसार आप उचित खाद व उर्वरको का उपयोग कर सकें।

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