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शरदकालीन गन्ने की खेती कर रहे हैं तो इस विधि को अपनाएँ, बढ़ जाएगा आपका मुनाफा

नई दिल्ली: अगर आप शरदकालीन गन्ने की खेती कर रहे हैं तो बेहतर होगा कि इसके साथ कुछ अन्य फसलों की भी खेती करें। क्योंकि इस मौसम में गन्ने की पैदावार अपेक्षाकृत थोड़ी कम देखने को मिलती है। इसलिए लागत के मुकाबले आमदनी को बढ़ाने के लिए बेहतर होगा कि आप शरदकालीन गन्ने के साथ के आलू की भी खेती करें। इससे आपको अच्छा मुनाफा हो सकता है।

शरदकालीन गन्ने की बुआई का समय 15 सितंबर से लेकर 15 अक्टूबर तक है। अगर आपने गन्ने के साथ पहले ही आलू की सहफसली खेती कर दी है तो समय रहते दोनों फसलों की खेती पर ध्यान दें। मसलन – दोनों फसलों की विभिन्न रोगों व कीटों से रक्षा के उपाय अपनाएँ। एक से दो सप्ताह के अंतराल पर खेत में घूमकर फसलों का सूक्ष्म निरीक्षण करते रहें। खास तौर पर जब तापमान में बहुत गिरावट हो जाए तब इसके प्रभावों पर कड़ी नज़र रखें। अगर आप गन्ने व आलू दोनों फसलों की ठीक से देखभाल करेंगे तो आपको कम समय में अच्छी आय प्राप्त हो सकेगी। यही नहीं, इन दोनों फसलों की खेती से मिट्टी की उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी।

आपको बता दें कि गन्ने के कुल क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा शरदकाल में बोया जाता है। इस दौरान गन्ने की बुआई 90 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए। उत्तर भारत में गन्ने की खेती मुख्य रूप से अक्टूबर या फरवरी-मार्च के दौरान की जाती है। दिसम्बर से लेकर फरवरी महीने तक कम तापक्रम के कारण शरदकालीन गन्ने की बढ़वार नहीं होती है। इसलिए सहफसली खेती करने से इस दौरान दूसरी फसल तैयार हो जाती है।

गन्ने के साथ सहफसली खेती करने से उत्पादन व्यय कम हो जाता है। क्योंकि गन्ने की दो पंक्तियों के बीच खाली स्थान का भरपूर उपयोग हो जाता है। इसके अलावा किसान को गन्ने के साथ आलू की सहफसली खेती से मात्र 100 से 120 दिनों में प्रति एकड़ 60 से 70 क्विंटल आलू की पैदावार भी प्राप्त हो जाती है। किसान मित्रों, अगर आप भी गन्ने और आलू की सहफसली खेती करना चाहते हैं कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें। जैसे –

खेत की तैयारी करते समय 2 जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या हैरो से और तीन जुताई कल्टीवेटर से करें। मिट्टी को भुरभूरी करने के लिए रोटावेटर से एक जुताई ज़रूर करें।

शरदकालीन गन्ने की बुआई के लिए जहाँ 15 सितम्बर से लेकर अक्टूबर का पूरा महीना उचित होता है वहीं, आलू की बुआई के लिए 15 अक्टूबर से नवम्बर का पूरा महीना उपयुक्त होता है।

को – 0238, को – 8272, 8279, को – 8452 व 11453 शरदकालीन गन्ने की कुछ प्रमुख किस्में हैं। इनसे आपको बढ़िया पैदावार प्राप्त हो सकती है।

शरदकालीन गन्ने की बुआई के लिए जहाँ तक हो सके पौधशाला से स्वीकृत गन्ने के बीज का ही उपयोग करें। बहुत गिरा हुआ गन्ना बुआई के लिए उपयुक्त नहीं होता है। इसलिए इनकी बुआई से परहेज करें।

अगर आप ट्रेन्च विधि से गन्ने की बुआई करना चाहते हैं तो दो पंक्तियों के बीच 120 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखें। वहीं सामान्य विधि से बुआई के लिए 90 सेंटीमीटर की उचित होगी।

किसान मित्रों, गन्ने की किस्मों के साथ-साथ आलू की उचित किस्मों का चुनाव भी काफी आवश्यक है। कुफरी लालिमा, कुफरी आनन्द, कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति, कुफरी बहार आदि आलू की प्रमुख किस्में हैं। आप इनमें से किसी भी किस्म का चुनाव कर सकते हैं।

अगर आप ट्रेन्च विधि से आलू की बुआई करना चाहते हैं तो गन्ने की दो पंक्ति के बीच आलू की दो पंक्तियाँ लगाएं। जबकि सामान्य विधि में आलू की एक ही पंक्ति लगाएं।

आलू बोने के 25 से 30 दिनों के बाद निराई-गुड़ाई कर खेत से खरपतवारों को निकाल दें। इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व बर्बाद नहीं होंगे।

जहाँ तक आलू की सिंचाई का सवाल है तो आवश्यकतानुसार 12 से 15 दिनों के अन्तर पर हल्की सिंचाई करें।

शरदकालीन गन्ने के साथ आलू की सहफसली खेती कर आप प्रति एकड़ 350 से 450 क्विंटल गन्ने का उत्पादन कर सकते हैं। इसके साथ-साथ आप प्रति एकड़ 60 से 70 क्विंटल तक आलू भी उत्पादित कर सकेंगे।

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