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उत्तर प्रदेश में गन्ने की नई सट्टा व आपूर्ति नीति जारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के आगामी पेराई सत्र के लिए नयी सट्टा नीति घोषित कर दी है। प्रदेश में गन्ना के बढ़ते उत्पादन को देखते हुए प्रति हेक्टेयर गन्ने की आपूर्ति की सीमा बढ़ा दी गई है। नई गन्ना सट्टा नीति के अंतर्गत्त गन्ना पेराई सत्र 2021-22 में आपूर्ति सीमा प्रति सीमांत किसान अधिकतम 850 क्विंटल, प्रति लघु किसान 1700 क्विंटल और सामान्य किसान के लिए 4250 क्विंटल तय की गई है। उपज बढ़ोत्तरी की दशा में सट्टे की अधिकतम सीमा सीमांत किसानों के लिए 1350, लघु किसानों के लिए 2700 व सामान्य किसानों के लिए 6750 क्विंटल होगी।

सरकार के इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा कि, “पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ना सट्टा आपूर्ति नीति जारी कर दी गई है। आपूर्ति नीति के आधार पर प्रदेश के किसानों के गन्ने की पर्चियां के प्रकाशन सहित आपूर्ति के लिए विस्तृत निर्देश चीनी मिलों को दिए गये हैं।”

गन्ने की नई सत्ता नीति के बारे में गन्ना आयुक्त ने बताया कि, “गन्ना विकास विभाग द्वारा जारी इस वर्ष की सट्टा एवं आपूर्ति नीति में किसान हितों को देखते हुए कई बदलाव किए हैं। मसलन, अब जमीन के क्रय-विक्रय के बाद बेसिक कोटे के हस्तांतरण में किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और इसका सीधा हस्तांतरण कर दिया जाएगा। इसके अलावा किसान की मृत्यु की दशा में पहले उसका सट्टा तत्काल बंद कर दिया जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।”

बताते चलें कि प्रदेश के जो किसान सिंचाई के लिए ड्रिप इर्रिगेशन पद्धति का इस्तेमाल करते हैं, अब उनको नयी सट्टा नीति के अंतर्गत्त अतिरिक्त सट्टे में प्राथमिकता दी जाएगी। अतिरिक्त सट्टे में अस्वीकृत गन्ना प्रजातियों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। इस नीति से जुड़ी एक और अहम बात यह है कि गन्ना किसान की मृत्यु होने के बावजूद भी उसका सट्टा जारी रहेगा और उसके वारिस मिलों को गन्ने की आपूर्ति जारी रख सकेंगे। हालाँकि, इसके लिए यह जरूरी होगा कि किसान के वारिस को गन्ना मूल्य का भुगतान तभी किया जाएगा जब नियमानुसार सभी वारिस तय हो जाएंगे।

अब तक किसानों को उपज बढ़ोत्तरी के लिए प्रार्थनापत्र देने पर शुल्क देना पड़ता था लेकिन, अब उत्तम गन्ना किसानों को शुल्क नहीं देना होगा। सैनिकों, अर्द्घसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों तथा स्वतंत्रता सेनानियों व उनके उत्तराधिकारियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।

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