कृषि पिटारा

रबी सीजन में सरसों और कपास की फसलों को माहु और पिंक बॉलवर्म से बचाने के ये हैं उपाय

नई दिल्ली: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने किसानों को रबी सीजन में सरसों और कपास की फसलों को माहु रोग और पिंक बॉलवर्म से बचाने के उपायों के बारे में सलाह दी है।

सरसों की फसल को माहु रोग से बचाने का उपाय:

यदि मौसम अनुकूल हो तो सरसों की फसल पर चेपे (अल/माहू) का आक्रमण हो सकता है। जब 10 प्रतिशत पुष्पित पौधों पर औसतन 13 कीट प्रति पौधा हों, तो 250 से 400 मि.ली. मिथाईल डेमेरान (मेरा सिस्टाक्स) 25 ई. सी. या डाईमेथोएट (रोगोर) 30 ई. सी को 250-400 लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ फसल पर स्प्रे किया जा सकता है।

फसल को मधुमक्खियों से बचाने के लिए स्प्रे दोपहर 3 बजे के बाद ही किया जाना चाहिए। यदि आवश्यकता हो, तो 15 दिन बाद फिर स्प्रे किया जा सकता है। यदि फसल पर सफेद रतुआ व डाउनी मिल्ड्यू के लक्षण दिखाई दें, तो 600 ग्राम मैन्कोजेब (डाईथेन या इण्डोफिल-एम-45) को 250-300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है।

कपास की फसल को पिंक बॉलवर्म से बचाने के उपाय:

यदि कपास की फसल के बाद खेत खाली रह गया हो तो फरवरी के अंत में गहरी जुताई करनी चाहिए। इससे मिट्टी में पड़ी सूण्डियों को पक्षी खा जाएंगे।

अगली फसल में गुलाबी व चितकबरी सूण्डियों व मिलीबग का आक्रमण कम करने के लिए टहनियों के साथ लगे टिन्डों को झाड़कर नष्ट किया जा सकता है।

यदि टहनियां खेत में खड़ी हों, तो उनकी गहरी कटाई करनी चाहिए।

मोढ़ी की फसल कभी न लगाई जानी चाहिए।

इन उपायों के पालन से किसान सरसों व कपास की फसल को कीटों और रोगों से सुरक्षित रख सकते हैं और अधिक उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं।

Related posts

Leave a Comment