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ये हैं मछलियों में लगने वाले प्रमुख रोग, ऐसे करें बचाव

एक व्यवसाय के तौर पर मछली पालन कितना फायदेमंद है, और मछलियों में मुख्य रूप से कौन-कौन से रोग लगते हैं? आइये जानते हैं मछलियों में लगने वाले प्रमुख रोगों और उससे बचाव के बारे में।

मछली पालन आज के समय में एक प्रतिष्ठित व्यवसाय के रूप में स्थापित हो चुका है। इस क्षेत्र में नयी-नयी तकनीकों के इस्तेमाल से रोजगार के काफी अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

किसान मित्रों, अगर आप मछली पालन कर रहे हैं या फिर भविष्य में करना चाहते हैं तो आपको मछलियों में लगने वाले कुछ प्रमुख रोगों के प्रति सावधान रहना होगा। इससे आप समय रहते मछलियों को विभिन्न रोगों से बचा सकते हैं।

ये हैं मछलियों में लगने वाले कुछ प्रमुख रोग:

मछलियों को अल्सर रोग काफी नुकसान पहुंचाता है। यह रोग सुडोमोनाज और एरोमोनास जीवाणुओं की वजह से होता है। अल्सर रोग से ग्रस्त मछली के शरीर पर गुलाबी और सफेद रंग के खुले घाव बन जाते हैं। मछलियों में इस रोग के लगने का प्रमुख कारण है, पानी की खराब गुणवत्ता या पानी के पी०एच० का स्तर का अत्याधिक होना। इनके कारण छोटे-छोटे घाव भी अक्सर रोग से ग्रसित हो जाते हैं।

इससे बचाव के लिए पानी में मौजूद अमोनिया और नाईट्राइट का निरीक्षण करें और प्रदूषित जल के स्तर को कम करने के लिए पानी को ज्यादा मात्रा में बदलते रहें। आपको बता दें कि मछली में खुले घाव होने की वजह से मछली जल्दी-जल्दी नमक की मात्रा छोड़ती है। इसे नियंत्रित करने के लिए पानी में रॉक साल्ट को 1 से 3 ग्रा०/लीटर के अनुसार डालें।

इसके आप अलावा एंटी अल्सर उपचार का भी प्रयोग कर सकते हैं। ध्यान रखें कि अगर इस इलाज का कोई असर ना दिखे तो फिर यथाशीघ्र मत्स्य चिकित्सक से संपर्क करना बेहतर होगा। संभव है कि वो आपको शक्तिशाली एंटी बायोटिक दवाओं के प्रयोग की सलाह दे।

अगला रोग है जलोदर रोग। मछली में जलोदर रोग आमतौर पर जीवाणुओं के संक्रमण के कारण होता है। इसके अलावा वायरल संक्रमण और पोषक परिवर्तनशीलता भी इस रोग के कारण हो सकते हैं। इस रोग के दौरान मछली में द्रव की मात्रा बढ़ने से मछली के शरीर में सूजन आ जाती है। मछली की परत उठ जाती है और आँखें उभरी हुई नजर आने लगती हैं।

यह संक्रमण मुख्य रूप से खराब पानी तथा पानी में मौजूद अमोनिया और नाईट्राईट के कारण होता है। इसका संक्रमण अक्सर अकेली मछली तक ही सीमित रहता है। इस रोग का उपचार करना कई बार मुश्किल हो जाता है। इसलिए इस रोग पर नियंत्रण के लिए विस्तृत एंटी-बैक्टीरिया इलाज की पद्धती कारगर साबित होती है।

मछली में लगने वाला एक अन्य प्रमुख रोग है, सफेद दाग का होना। इस रोग से संक्रमित होने पर मछली की चमड़ी, सुफना और गलफड़ पर नमक के दाने के बराबर छोटे-छोटे सफेद दाग पड़ जाते हैं। इस सफेद रोग का मुख्य कारण खराब पानी और तापमान में उतार चढ़ाव का होना है। इससे बचाव के लिए ज़रूरी है कि पानी पूरी तरह से प्रदूषण रहित हो। इस रोग का उपचार आप एन्टीपेरासाईट चिकित्सा पद्धती से कर सकते हैं।

मछली की चमड़ी या सुफना में लालपन आना भी मछलियों की एक प्रमुख बीमारी है। यह रोग ज्यादातर नई आयात की गई मछलियों में होता है। खराब पानी विशेषकर पानी में मौजूद अमोनिया और नाईट्राइट के कारण भी यह रोग पैदा होता है। कई बार मछली के गलत रखरखाव, एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने और आपसी लड़ाई के कारण मछली के शरीर पर घाव उत्पन्न हो जाते हैं।

इससे बचाव के लिए पानी की गुणवत्ता को सुधारें और शीघ्रता से उपचार करें। इसके लिए रॉक साल्ट की मात्रा 1-3 ग्राम/प्रति लीटर का इस्तेमाल करें ताकि नमक की कमी को पूरा किया जा सके। यदि रोग गम्भीर हो तो मछली के डॉक्टर द्वारा दिए गए सलाह के अनुसार ही कार्यवाही करें।

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