कृषि पिटारा छोटका पत्रकार

ये जैविक उर्वरक मिट्टी की सेहत के लिए हैं बहुत ही फायदेमंद, ऐसे करें इनका निर्माण

नई दिल्ली: जैविक खेती के कई लाभ हैं। इससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है। जैविक विधि से उगायी गई फसलों का स्वाद और उनकी पौष्टिकता अच्छी होती है। इस विधि से उगाए गए उत्पाद हानिकारक रसायनों से मुक्त होते हैं। जहाँ तक बात है जैविक उत्पादों से होने वाली आमदनी की तो इन उत्पादों का बाजार मूल्य अधिक होने से अधिक लाभ मिलता है। किसान मित्रों, अगर आप जैविक उर्वरकों के जरिये भूमि की उर्वरता बढ़ाना चाहते हैं तो यह काफी आसान है। कई ऐसे उर्वरक हैं जिनका निर्माण आप अपने स्तर पर कर सकते हैं जैसे – संजीवक, जीवामृत और पाँचगब्य इत्यादि। इन्हें आप इस प्रकार बना सकते हैं:

सबसे पहले जानते हैं संजीवक बनाने की विधि के बारे में। 100 किलोग्राम गाय का गोबर, 100 लीटर गोमूत्र और 500 ग्राम गुड़ को 300 लीटर जल में 10 दिन तक सड़ने दें। इसके बाद 20 गुना पानी मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र में मिट्टी पर छिड़कने या सिंचाई जल के साथ प्रयोग करें।

जीवामृत बनाने के लिए 10 किलोग्राम गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलोग्राम गुड़, 2 किलोग्राम किसी दाल का आटा और 1 किलोग्राम जीवंत मिट्टी को 200 लीटर जल में मिलाकर 5 से 7 दिनों तक सड़ने दें। इसके अलावा नियमित रूप से दिन में 3 बार मिश्रण को मिलाते रहें। इसके बाद आप एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई जल के साथ इसका प्रयोग कर सकते हैं।

किसान मित्रों, पंचगव्य बनाने के लिए गाय के गोबर का घोल 4 किलोग्राम, गाय का गोबर 1 किलोग्राम, गोमूत्र 3 लीटर, गाय का दूध 3 लीटर, छाछ 2 लीटर और 1 किलोग्राम गाय के घी को मिलाकर 7 दिन तक सड़ने दें। इसके बाद इस मिश्रण को प्रतिदिन दो बार मिलाते रहें। सात दिन के बाद आप 3 लीटर पंचगव्य को 100 लीटर पानी में मिलाकर मिट्टी पर छिड़काव कर सकते हैं। आप चाहें तो 20 लीटर पंचगव्य को सिंचाई जल के साथ भी एक एकड़ खेत में प्रयोग कर सकते हैं।

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